क्या अखिलेश का सेक्युलरिज़्म ‘चुनिंदा’ है? संत अनिरुद्धाचार्य का अखिलेश यादव पर पलटवार

आप अलग–हम अलग’ क्यों? अनिरुद्धाचार्य का पलटवार– अखिलेश मुसलमानों से ये बात क्यों नहीं कहते?
News Desk 17 Jul 2025, 02:30 AM 1 min read
क्या अखिलेश का सेक्युलरिज़्म ‘चुनिंदा’ है? संत अनिरुद्धाचार्य का अखिलेश यादव पर पलटवार

लखनऊ - धर्म और राजनीति के टकराव का एक और वीडियो अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के बीच की बहस एक बार फिर सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही है। बहस की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण के नाम को लेकर हुई, मगर बात आकर धर्म, जाति और राजनीतिक मतभेदों तक पहुँच गई।

अनिरुद्धाचार्य ने अब अखिलेश यादव को उनके "आज से आपका रास्ता अलग, हमारा अलग" वाले बयान पर तीखा जवाब दिया है। उन्होंने कहा, "एक राजा यदि मुख्यमंत्री बनकर अपनी प्रजा से इस तरह दूरी बना ले, तो फिर वह प्रजा का सेवक नहीं, शासक बन जाता है।"

"आपका रास्ता अलग, मेरा अलग" — लेकिन मुसलमानों से ये नहीं कहेंगे?"

अनिरुद्धाचार्य ने अपने प्रवचन में कहा, “वो मुझे कहते हैं कि तुम अलग, हम अलग... लेकिन कभी मुसलमानों से नहीं कहेंगे कि तुम्हारा रास्ता अलग। उन्हें तो कहते हैं कि जो तुम्हारा रास्ता है वही हमारा है। ऐसा द्वैष और पक्षपात लेकर देश का कल्याण कैसे होगा?”

वायरल वीडियो की पृष्ठभूमि

दरअसल, यह बहस 2023 में एक्सप्रेस वे पर हुई एक संक्षिप्त मुलाकात के दौरान हुई थी जब अखिलेश यादव और अनिरुद्धाचार्य आमने–सामने आए। वहां श्रीकृष्ण के नाम और शूद्र शब्द को लेकर दोनों के बीच वैचारिक टकराव हुआ। कथित रूप से अनिरुद्धाचार्य अखिलेश यादव के सवालों का 'सटीक जवाब' नहीं दे पाए, जिसके बाद सपा प्रमुख ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा, "अब से आप अलग, हम अलग।"

"नेता सवाल पूछने से पहले समझें जिम्मेदारी"

अनिरुद्धाचार्य ने कहा, "सवाल पूछने से पहले समझना चाहिए कि उत्तर देने वाला कोई राजनेता नहीं, बल्कि एक संत है। कोई मां अगर अपने बेटे से जवाब न मिलने पर कहे कि अब रास्ते अलग, तो क्या उसे मां कहा जाएगा?"

उन्होंने यह भी कहा कि नेता जनता को संतान के समान माने, लेकिन यहां तो सवालों में अहंकार और जवाबों में जातिवाद है।

राजनीति बनाम धार्मिक विचारधारा: क्या यह बहस रुकेगी?

यह विवाद कहीं न कहीं यह दर्शाता है कि धर्म और राजनीति का संगम जब व्यक्तिगत विचारधाराओं से टकराता है, तो उसका असर सीधा सामाजिक माहौल पर पड़ता है। अनिरुद्धाचार्य के इस जवाब से यह स्पष्ट है कि अब यह मामला केवल व्यक्तिगत तकरार नहीं, बल्कि सामाजिक विमर्श का मुद्दा बन गया है।

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