अब फिरोजाबाद का कांच पहुंच रहा दुनिया तक - सीएम योगी ने गिनाईं बदलाव की तस्वीरें

658 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के बीच मुख्यमंत्री ने फिरोजाबाद के कांच उद्योग, ODOP मॉडल और कानून व्यवस्था को विकास की नई पहचान बताया।

 

होली, दिवाली और दशहरा जैसे त्योहारों पर कभी बाजारों में चीन में बने सजावटी उत्पादों की भरमार दिखाई देती थी। अब वही बाजार एक अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को फिरोजाबाद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इसी बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों ने ऐसी पहचान बनाई है कि आज कांच से बनी मूर्तियां और कलाकृतियां केवल प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश-विदेश तक पहुंच रही हैं। यह टिप्पणी उस समय आई जब मुख्यमंत्री 658 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 81 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के लिए कांच नगरी पहुंचे थे।

 

कार्यक्रम में विकास परियोजनाओं की घोषणा तो केंद्र में थी, लेकिन मुख्यमंत्री के संबोधन में एक बड़ा हिस्सा फिरोजाबाद की बदलती औद्योगिक पहचान पर भी केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि यहां का ग्लास उद्योग अब केवल पारंपरिक कारोबार नहीं रह गया है। नई तकनीक, आधुनिक डिजाइन और बदलती बाजार मांग के अनुरूप उत्पादों ने इसे नई दिशा दी है। मुख्यमंत्री के अनुसार, गणपति, राम दरबार, राधा-कृष्ण, भगवान शिव और महात्मा बुद्ध की कांच से बनी प्रतिमाएं अब लोगों की पसंद बन रही हैं।

 

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में 'एक जिला एक उत्पाद' योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को उत्तर प्रदेश का ओडीओपी उत्पाद उपहार स्वरूप देते हैं तो यह पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय बनता है। फिरोजाबाद का कांच उद्योग भी इसी मॉडल के तहत नई पहचान प्राप्त कर रहा है। यह टिप्पणी कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच विशेष चर्चा का विषय रही क्योंकि इससे स्थानीय उद्योगों को वैश्विक मंच से जोड़ने की कोशिश का संदेश दिया गया।

 

विकास कार्यों के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 2017 से पहले कानून व्यवस्था की स्थिति अलग थी और वर्तमान सरकार विकास तथा विरासत दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार 'एक जिला-एक उत्पाद', 'एक जिला-एक मेडिकल कॉलेज' जैसी योजनाओं पर काम कर रही है, जबकि पूर्ववर्ती सरकारों के समय स्थिति अलग थी। 

 

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने एक दिलचस्प प्रसंग साझा किया। उन्होंने कहा कि लगभग नौ वर्ष पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उनसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई को लेकर चिंता जताई थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, बाद में उद्योगों को नई तकनीक, बेहतर गैस आपूर्ति और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया गया। आज कई इकाइयां बिजली आधारित भट्टियों और सौर ऊर्जा के उपयोग के साथ आगे बढ़ रही हैं।

 

भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आलू उत्पादक किसानों ने भी जनपद की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मुफ्त बिजली और अन्य योजनाओं का जिक्र करते हुए किसानों के लिए संचालित कार्यक्रमों की जानकारी दी।

 

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के योगदान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं बल्कि सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक योगदान की याद दिलाने का माध्यम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देशभर में उनकी 300वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए और विभिन्न स्थानों पर उनकी प्रतिमाएं स्थापित की गईं।

 

अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में मुख्यमंत्री ने शासन व्यवस्था और विकास मॉडल पर बात की। उन्होंने कहा कि यदि नीयत साफ हो तो नीति और नियंता दोनों मार्ग प्रशस्त करते हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अब आम नागरिकों को सरकारी कार्यालयों में पहले जैसी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता और विभिन्न योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंच रहा है।

 


 

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