देश की रक्षा चिकित्सा व्यवस्था में एक नया अध्याय जुड़ गया है। अब युद्धक्षेत्र में घायल सैनिकों के इलाज से लेकर जैविक, रासायनिक और परमाणु खतरों जैसी आपात परिस्थितियों से निपटने की तैयारियां एक ही मंच पर होंगी। इसी उद्देश्य के साथ राजधानी लखनऊ स्थित कमांड हॉस्पिटल (सेंट्रल कमांड) में देश के पहले समर्पित 'डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री मेडिसिन' की शुरुआत की गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को इसका वर्चुअल उद्घाटन किया।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सेना की मेडिकल सेवाओं के महानिदेशालय के अंतर्गत स्थापित यह विभाग भविष्य की युद्ध चुनौतियों, आपदाओं और जटिल सुरक्षा परिस्थितियों के अनुरूप सैन्य चिकित्सा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यहां सैनिकों के उपचार, अनुसंधान, प्रशिक्षण और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के विकास पर एक साथ कार्य किया जाएगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक दौर में राष्ट्रीय सुरक्षा केवल अत्याधुनिक हथियारों से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि सैनिकों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा और विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नया विभाग युद्ध के दौरान घायल सैनिकों के उपचार के साथ-साथ सैन्य चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार का राष्ट्रीय केंद्र बनने की दिशा में काम करेगा।
उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए सेना को ऐसी चिकित्सा प्रणाली की आवश्यकता है, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा सके।
नव स्थापित विभाग में कॉम्बैट सर्जरी, सैन्य ट्रॉमा, युद्धक्षेत्र नर्सिंग, आपातकालीन चिकित्सा, क्रिटिकल केयर, सैन्य मेडिकल लॉजिस्टिक्स, आपदा प्रबंधन, मानवीय सहायता एवं राहत कार्यों के साथ-साथ रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु और विस्फोटक खतरों से निपटने संबंधी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसके माध्यम से सेना के डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों और मेडिकल स्टाफ को आधुनिक युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में उपचार की गति और गुणवत्ता दोनों बेहतर हो सकें।
विभाग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दूरस्थ चिकित्सा, सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण, पहनने योग्य स्वास्थ्य उपकरण, पूर्वानुमान आधारित विश्लेषण और उन्नत जांच तकनीकों जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं का उपयोग किया जाएगा।
इन तकनीकों की मदद से सैनिकों के स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी, बीमारियों की समय रहते पहचान और उपचार प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इससे सैनिकों की परिचालन क्षमता और मनोबल दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि यह विभाग युवा सैन्य चिकित्सकों के लिए उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और सुपर स्पेशलाइजेशन का प्रमुख संस्थान बनेगा। यहां नई चिकित्सा तकनीकों पर अनुसंधान, विशेष मेडिकल प्रोटोकॉल का विकास और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार कार्य किया जाएगा।
इसके अलावा भविष्य की सैन्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसे चिकित्सा मॉडल विकसित किए जाएंगे, जिन्हें युद्धक्षेत्र और आपदा दोनों परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
रक्षा मंत्री ने बताया कि आने वाले वर्षों में इस विभाग को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। रक्षा रणनीति विजन 2026-30 के तहत यह पहल सैन्य चिकित्सा अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने के साथ भारत की रक्षा चिकित्सा प्रणाली को वैश्विक पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
समारोह में मौजूद सैन्य अधिकारियों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस पहल को भारतीय सशस्त्र बलों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनका कहना था कि यह विभाग भविष्य के युद्धों, प्राकृतिक आपदाओं और अन्य आपात परिस्थितियों में सैनिकों को बेहतर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ सैन्य चिकित्सा अनुसंधान और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा।
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