राजधानी लखनऊ में दोस्ती, भरोसे और साझेदारी के नाम पर कथित तौर पर 66 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक कारोबारी को कंपनी में निवेश और साझेदारी का भरोसा दिलाकर पहले उसके नाम पर बैंक में करंट अकाउंट खुलवाया गया। इसके बाद खाते से जुड़े सिम कार्ड, चेकबुक, एटीएम कार्ड और ईमेल आईडी सहित अन्य जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर खाते में आए करीब 66 लाख रुपये महज तीन घंटे के भीतर अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। मामले में पीड़ित की शिकायत पर बीबीडी थाने में मुकदमा दर्ज कर पुलिस जांच में जुट गई है।
पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार, बलिया निवासी और वर्तमान में बीबीडी क्षेत्र स्थित कपीश विहार कॉलोनी में रहने वाले राजीव कुमार सिंह जियोवांटा रिसोर्सेज (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड के प्रोपराइटर हैं। उनका आरोप है कि परिचित अभिषेक पांडेय ने कंपनी में निवेश और साझेदारी का प्रस्ताव देकर उनका विश्वास जीता। आरोपी ने यह भी भरोसा दिलाया कि उसके परिचित निवेशकों की रकम एक नए बैंक खाते में आएगी, जिसके लिए आईसीआईसीआई बैंक की खुर्रमनगर शाखा में करंट अकाउंट खुलवाया गया।
तहरीर के मुताबिक, 14 जुलाई को अभिषेक पांडेय उन्हें दिल्ली ले गया। वहां बैंक खाते की जांच कराने का बहाना बनाकर खाते से जुड़ा सिम कार्ड, चेकबुक, एटीएम कार्ड, ईमेल आईडी और पासवर्ड अपने पास रख लिए। पीड़ित का कहना है कि उस समय उन्हें किसी तरह की धोखाधड़ी का संदेह नहीं हुआ।
पीड़ित के अनुसार, 16 जुलाई को उनके बैंक खाते में करीब 66 लाख रुपये जमा हुए। आरोप है कि रकम जमा होने के महज तीन घंटे के भीतर पूरी राशि अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई। इस दौरान उन्हें किसी प्रकार की जानकारी नहीं मिली।
राजीव कुमार सिंह का कहना है कि 19 जुलाई को लखनऊ लौटने पर बैंक मैनेजर ने बड़े लेन-देन की जानकारी दी। इसके बाद बैंक स्टेटमेंट निकलवाने पर पता चला कि खाते में आई पूरी रकम कुछ ही घंटों में दूसरे खातों में भेजी जा चुकी थी। तब उन्हें कथित धोखाधड़ी की जानकारी हुई।
घटना की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित ने बीबीडी थाने में अभिषेक पांडेय समेत अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, विश्वासघात और रकम हड़पने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने मामला दर्ज कर बैंक खातों के लेन-देन, संबंधित दस्तावेजों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। बैंक खातों के ट्रांजेक्शन, संबंधित दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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