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अमेरिका के लोगों को निशाना बनाकर चल रहा था कॉल सेंटर, लखनऊ से 119 साइबर ठग गिरफ्तार

एफबीआई, यूएस ट्रेज़री और अन्य अमेरिकी एजेंसियों का अधिकारी बनकर लोगों को डराते थे आरोपी, गिफ्ट कार्ड और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए करते थे वसूली।
Bureau
Bureau News Desk
02 Jul 2026
02:46 PM
1 min read
अमेरिका के लोगों को निशाना बनाकर चल रहा था कॉल सेंटर, लखनऊ से 119 साइबर ठग गिरफ्तार
लखनऊ में इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़, 119 आरोपी गिरफ्तार
हाइलाइट्स
लखनऊ के विभूतिखंड में फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़।
संयुक्त कार्रवाई में 119 साइबर आरोपी गिरफ्तार।
आरोपी अमेरिकी सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर लोगों को ठगने के आरोप में गिरफ्तार।
103 लैपटॉप, 177 मोबाइल, 68 आईफोन समेत बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण बरामद।

राजधानी लखनऊ में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस कमिश्नरेट की साइबर क्राइम सेल ने विभूतिखंड क्षेत्र में संचालित एक कथित फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। संयुक्त अभियान के दौरान 119 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाकर खुद को विभिन्न सरकारी एजेंसियों और बड़ी संस्थाओं का अधिकारी बताकर साइबर ठगी करता था।

पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी इंटरनेट आधारित कॉलिंग सिस्टम और अन्य डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल कर विदेशी नागरिकों से संपर्क करते थे। इसके बाद उन्हें कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उनकी व्यक्तिगत और बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल की जाती थी तथा गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल वाउचर के जरिए भुगतान कराया जाता था।

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पुलिस के अनुसार अनुसार गिरोह इंटरनेट आधारित कॉलिंग प्लेटफॉर्म, वॉइप कॉलिंग सिस्टम, आयीबीम डायलर , तैयार स्क्रिप्ट और फर्जी सरकारी दस्तावेजों का इस्तेमाल करता था। आरोपी खुद को फ़ेडरल ट्रेड कमीशन, एफबीआई, यूएस मार्शल सर्विस और यूएस ट्रेज़री डिपार्टमेंट सहित अन्य अमेरिकी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करते थे।

पुलिस के मुताबिक बातचीत के दौरान पीड़ितों को कानूनी कार्रवाई, बैंक खाते फ्रीज होने या पहचान संबंधी समस्याओं का डर दिखाया जाता था। इसके बाद उनसे सोशल सिक्योरिटी नंबर, बैंकिंग विवरण और अन्य निजी जानकारी प्राप्त की जाती थी।

जांच में सामने आया कि गिरोह पीड़ितों से सीधे बैंक खाते में रकम लेने के बजाय गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल वाउचर के माध्यम से भुगतान कराने के लिए कहता था। पुलिस के अनुसार इस तरीके का इस्तेमाल धन के वास्तविक स्रोत और लेनदेन की श्रृंखला को छिपाने के लिए किया जाता था।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि पूरे नेटवर्क को अलग-अलग जिम्मेदारियों वाली टीमों में विभाजित किया गया था।

  • बैटिंग टीम संभावित पीड़ितों को फर्जी संदेश और संपर्क भेजती थी।
  • डायलर टीम इंटरनेट आधारित कॉल के जरिए लोगों से संपर्क करती थी।
  • बैंकर टीम बैंकिंग और वित्तीय जानकारी जुटाने का काम करती थी।
  • क्लोज़र टीम पीड़ितों पर भुगतान के लिए दबाव बनाती थी।

पुलिस के अनुसार इस तरह पूरे नेटवर्क को संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और डिजिटल सामग्री बरामद की है। इनमें: 103 लैपटॉप, 177 मोबाइल फोन, 68 एप्पल आईफोन, 99 कंप्यूटर माउस, 116 हेडफोन, 111 चार्जर, 8 वाई-फाई एवं इंटरनेट राउटर, इंटरनेट कॉलिंग सिस्टम, डिजिटल डेटा, कथित फर्जी दस्तावेज शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में विभिन्न राज्यों के युवक और युवतियां शामिल हैं। सभी से पूछताछ की जा रही है। मामले में थाना साइबर क्राइम में मुकदमा संख्या 78/2026 दर्ज किया गया है।

पुलिस ने बताया कि बरामद डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। इसके आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों, वित्तीय लाभार्थियों और संभावित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इस नेटवर्क का संचालन कितने समय से किया जा रहा था और इससे जुड़े अन्य लोग कहां-कहां सक्रिय हैं।

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