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एमसीडी रिश्वत कांड में दो क्लर्क गिरफ्तार, अब पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर से होगी पूछताछ

डेम्स विभाग के दोनों बिलिंग क्लर्क रिश्वत की रकम लेते पकड़े गए, एसीबी तत्कालीन असिस्टेंट कमिश्नर और एक अन्य कर्मचारी से पूछताछ करेगी।
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Bureau News Desk
15 Sep 2026
12:25 PM
1 min read
एमसीडी रिश्वत कांड में दो क्लर्क गिरफ्तार, अब पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर से होगी पूछताछ
इमेज सोर्स एआई
हाइलाइट्स
एमसीडी के पूर्वी जोन में दो बिलिंग क्लर्क गिरफ्तार किए गए हैं।
दोनों पर सेवानिवृत्त कर्मचारी के लंबित बिल पास कराने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप है।
एसीबी ने शिकायत के सत्यापन के बाद ट्रैप कार्रवाई की थी।
रिश्वत की रकम लेते समय दोनों कर्मचारियों को पकड़ा गया।

पूर्वी दिल्ली। एमसीडी के पूर्वी जोन में सेवानिवृत्त कर्मचारी के लंबित बिल पास कराने के नाम पर रिश्वत लेने के आरोप में दो बिलिंग क्लर्कों को गिरफ्तार किया गया है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए डेम्स विभाग में तैनात संजय और हरीश को रिश्वत की रकम लेते हुए पकड़ा।

मामले की जांच अब दोनों गिरफ्तार कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। एसीबी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि लंबित बिलों को पास कराने की प्रक्रिया में दोनों की भूमिका कितनी थी और क्या इस प्रक्रिया में उनसे ऊपर के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी की भी भूमिका थी। इसी सिलसिले में तत्कालीन असिस्टेंट कमिश्नर और एक अन्य कर्मचारी से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।

जानकारी के अनुसार, एक पूर्व कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के बाद उसके कुछ बिल लंबित थे। इन बिलों को पास कराने के नाम पर रिश्वत मांगे जाने की शिकायत एसीबी को मिली थी। शिकायत मिलने के बाद एजेंसी ने पहले उसका सत्यापन किया। सत्यापन के बाद एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। पूर्व कर्मचारी को रिश्वत की रकम देकर दोनों कर्मचारियों के पास भेजा गया था। रकम लेने के दौरान एसीबी की टीम ने कार्यालय के बाहर दोनों कर्मचारियों को पकड़ लिया। इसके बाद मामले में आगे की जांच शुरू की गई।

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गिरफ्तार किए गए दोनों कर्मचारी डेम्स विभाग में बिलिंग क्लर्क के तौर पर तैनात बताए गए हैं। एसीबी अब यह जांच कर रही है कि लंबित बिलों को पास कराने की प्रक्रिया में उनकी वास्तविक जिम्मेदारी क्या थी। जांच का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि क्या दोनों कर्मचारियों के स्तर पर ही बिलों को लेकर रिश्वत की मांग की गई थी या इस प्रक्रिया में किसी अन्य अधिकारी अथवा कर्मचारी की भी भूमिका थी। इसके लिए एसीबी संबंधित दस्तावेजों और फाइलों की जांच कर रही है। एजेंसी यह भी देख रही है कि पूर्व कर्मचारी के बिल किस स्तर पर लंबित थे और उन्हें आगे बढ़ाने या स्वीकृत कराने की प्रक्रिया में किन-किन कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका रही।

मामले की जांच के दौरान तत्कालीन असिस्टेंट कमिश्नर का नाम भी जांच के दायरे में आया है। एसीबी इस अधिकारी और एक अन्य कर्मचारी से पूछताछ करने की तैयारी में है। पूछताछ का उद्देश्य यह पता लगाना है कि लंबित बिलों की प्रक्रिया के बारे में संबंधित अधिकारियों को क्या जानकारी थी और फाइलें किन स्तरों से होकर आगे बढ़ी थीं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार तत्कालीन असिस्टेंट कमिश्नर या अन्य कर्मचारी की भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है। इसलिए इस स्तर पर किसी अधिकारी की संलिप्तता को स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं माना जा सकता।

एसीबी की जांच में केवल रिश्वत की रकम लेने की घटना ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया भी शामिल है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित बिल कितने समय से लंबित थे और उन्हें पास कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया क्या थी। इसके साथ ही संबंधित फाइलों की आवाजाही और उन पर हुई कार्रवाई की भी जांच की जाएगी। यह देखा जाएगा कि फाइल किस अधिकारी या कर्मचारी के पास गई, किस स्तर पर कार्रवाई हुई और बिलों को स्वीकृति के लिए किन अधिकारियों के सामने रखा गया। जांच एजेंसी गिरफ्तार कर्मचारियों के संपर्क में रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।

एसीबी के सामने जांच का एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि रिश्वत की मांग केवल गिरफ्तार किए गए दोनों क्लर्कों के स्तर पर थी या इसके पीछे कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था। इसके लिए पूछताछ के साथ-साथ दस्तावेजों की जांच की जा रही है। एसीबी यह भी देखेगी कि दोनों कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों के बीच किस तरह का संपर्क था तथा लंबित बिलों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में उनकी क्या भूमिका रही। आगे की कार्रवाई पूछताछ और दस्तावेजी जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जा सकती है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब एमसीडी के अलग-अलग विभागों में रिश्वतखोरी से जुड़े मामलों में अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के मामले सामने आते रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पूर्व में भी निगम में अलग-अलग स्तर के कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कार्रवाई की गई है। ताजा मामले में भी एसीबी की कार्रवाई के बाद जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, मौजूदा मामले में आगे की स्थिति एसीबी की जांच, पूछताछ और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा के बाद स्पष्ट होगी।

सेवानिवृत्ति के बाद लंबित बिलों को पास कराने की प्रक्रिया इस मामले की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। एसीबी यह निर्धारित करने का प्रयास कर रही है कि संबंधित बिल किस स्तर पर लंबित थे और उन्हें निपटाने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई। जांच एजेंसी संबंधित फाइलों के साथ उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी देख रही है, जिनके स्तर पर इन बिलों से जुड़ी कार्रवाई हुई थी। दोनों क्लर्कों की गिरफ्तारी के बाद अब तत्कालीन असिस्टेंट कमिश्नर और एक अन्य कर्मचारी से प्रस्तावित पूछताछ को जांच की अगली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर होगी।

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