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'श्रीराम मंदिर का प्रबंधन कर्मचारियों को सौंपा जाए', स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरएसएस की भूमिका पर उठाए सवाल

लखनऊ पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अयोध्या श्रीराम मंदिर के प्रबंधन को कर्मचारियों के हवाले करने की मांग की। गौ रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा के दौरान गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने और प्रभावी कानून बनाने की भी मांग उठाई।
Bureau
Bureau News Desk
09 Jul 2026
10:01 AM
1 min read
'श्रीराम मंदिर का प्रबंधन कर्मचारियों को सौंपा जाए', स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरएसएस की भूमिका पर उठाए सवाल
हाइलाइट्स
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने श्रीराम मंदिर का प्रबंधन कर्मचारियों को सौंपने की मांग की।
आरएसएस की मंदिर प्रबंधन में भूमिका पर सवाल उठाए।
गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने और प्रभावी कानून बनाने की मांग दोहराई।
81 दिवसीय गौ रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा 24 जुलाई को लखनऊ में समाप्त होगी।

गौ रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा के तहत राजधानी लखनऊ पहुंचे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के प्रबंधन को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि मंदिर का संचालन कर्मचारियों के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि श्रीराम मंदिर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के लोगों की भूमिका पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

बुधवार को विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि श्रीराम मंदिर का निर्माण और उससे जुड़े प्रमुख कार्य पूरे हो चुके हैं। ऐसे में मंदिर की व्यवस्थाओं का संचालन धार्मिक परंपराओं के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर का प्रबंधन कर्मचारियों को सौंपा जाना चाहिए।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि आरएसएस के लोगों की विचारधारा और श्रीराम के प्रति उनकी अवधारणा को लेकर उनकी आपत्ति है। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार आरएसएस के साहित्य में भगवान श्रीराम को ईश्वर के रूप में नहीं, बल्कि एक महान मानव के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसी आधार पर उन्होंने मंदिर प्रबंधन में उनकी भूमिका पर सवाल उठाए।

श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि मंदिर संचालन धार्मिक परंपराओं और स्थापित व्यवस्थाओं के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मामलों में केवल जांच या सजा की चर्चा से अधिक आवश्यक यह है कि मंदिर की व्यवस्था ऐसी हो, जिससे इस तरह के विवाद की स्थिति ही उत्पन्न न हो।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि उनकी 81 दिवसीय गौ रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा तीन मई को गोरखपुर से शुरू हुई थी। यह यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजर रही है और इसका समापन 24 जुलाई को लखनऊ के आशियाना स्थित स्मृति उपवन मैदान में होगा।

उन्होंने कहा कि समापन कार्यक्रम में देशभर से संतों के शामिल होने की संभावना है। यात्रा का उद्देश्य गाय की सुरक्षा के लिए जनजागरूकता बढ़ाना और सरकार से प्रभावी कानून बनाने की मांग करना है।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि गायों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने सरकार से गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की दिशा में पहल करने की मांग की। साथ ही कहा कि इस विषय पर ठोस कानूनी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर गायों की भूख और प्यास के कारण मौत हो रही है तथा इस दिशा में अपेक्षित स्तर पर प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य इसी मुद्दे पर समाज में जागरूकता पैदा करना और नीति स्तर पर कार्रवाई की मांग करना है।

गौ रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा के दौरान राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का स्वागत किया गया। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर उनका अभिनंदन किया।

मध्य विधानसभा क्षेत्र के लालबाग में नवीन धवन 'बंटी' और पार्षद देवेंद्र सिंह यादव 'जीतू' की ओर से पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। फैजुल्लागंज में समाजवादी पार्टी की नेता पूजा शुक्ला और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया।

इसके अलावा माल क्षेत्र के पीरनगर स्थित बूढ़े बाबा हनुमान मंदिर तथा राजाजीपुरम में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। राजाजीपुरम में पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक अरमान खान ने उनका स्वागत किया।

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