लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में लगातार बढ़ रही फीस और छात्रों के खिलाफ हो रही अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर प्रदेश की राजनीति में छात्र हितों का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। समाजवादी छात्र सभा ने गुरुवार को प्रेस वार्ता कर राज्य सरकार पर छात्र हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। संगठन ने कहा कि फीस वृद्धि के लिए कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं है और विरोध दर्ज कराने वाले छात्रों पर कार्रवाई की जा रही है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
प्रेस वार्ता में छात्र सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालयों में लगातार बढ़ाई जा रही फीस से आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवार सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा पहले से अधिक महंगी होती जा रही है, जिससे कई छात्रों के लिए पढ़ाई जारी रखना कठिन हो सकता है। संगठन ने सरकार से मांग की कि फीस निर्धारण के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और समान नीति बनाई जाए, ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
प्रेस वार्ता के दौरान छात्र नेताओं ने लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों के निष्कासन का मामला भी उठाया। उनका आरोप है कि अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई, जबकि प्रशासन को पहले संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास करना चाहिए था। संगठन का कहना है कि छात्र हितों से जुड़े मामलों में बातचीत का रास्ता अपनाना अधिक प्रभावी होगा।
समाजवादी छात्र सभा ने आरोप लगाया कि शिक्षा, रोजगार और छात्र सुविधाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रही है। संगठन ने कहा कि छात्रों से जुड़े विषयों पर ठोस नीति और प्रभावी निर्णय लेने की आवश्यकता है। प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए।
छात्र संगठन ने सरकार से मांग की कि विश्वविद्यालयों में लागू फीस वृद्धि की समीक्षा कर उसे वापस लिया जाए। साथ ही निष्कासित छात्रों के मामलों पर पुनर्विचार किया जाए और छात्र संगठनों के साथ नियमित संवाद स्थापित कर विवादों का समाधान निकाला जाए।
समाजवादी छात्र सभा ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन का कहना है कि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाई जाएगी।
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