'Kaun Pravin Tambe' Review: बड़े सपनो को पूरा करने की ताकत देती है फिल्म 'कौन प्रवीण तांबे'
‘कौन प्रवीण तांबे?’ बिल्कुल अलग कहानी के साथ आती है। फिल्म में आपको ये सीखने को मिलेगा कि उम्र चाहे जो भी हो, अगर सपना देखने की हिम्मत है तो उसे पूरा भी किया जा सकता है।
बॉलीवुड फैंस को कई अच्छी फिल्में दे चुके एक्टर श्रेयस तलपड़े ने ‘इकबाल’ के बाद एक बार फिर ऑन स्क्रीन गेंद अपने हाथों में संभाली है। श्रेयस तलपड़े की लेटेस्ट फिल्म ‘कौन प्रवीण तांबे?’ डिज्नी+ हॉटस्टार पर रिलीज हो गई हैं, जहां फिल्म को दर्शक अपना पूरा प्यार दे रहे हैं। इस फिल्म को साल 2005 में आई फिल्म ‘इकबाल’ की सीक्वेंस माना जा रहा था। लेकिन ‘कौन प्रवीण तांबे?’ बिल्कुल अलग कहानी के साथ आती है। फिल्म में आपको ये सीखने को मिलेगा कि उम्र चाहे जो भी हो, अगर सपना देखने की हिम्मत है तो उसे पूरा भी किया जा सकता है। फिल्म में श्रेयस तलपड़े ने एक अधेड़ उम्र के क्रिकेटर प्रवीण तांबे की भूमिका निभाई है। फिल्म रियल लाइफ क्रिकेटर ‘प्रवीण’ के जीवन पर आधारित है।
प्रवीण तांबे की कहानी
जिस उम्र में क्रिकेटर रिटायर होकर मैदान छोड़ने का विचार कर रहे होते हैं, उम उम्र में प्रवीण तांबे ने अपना क्रिकेट डेब्यू किया और शानदान प्रदर्शन किया। फिल्म में ‘प्रवीण तांबे’ (श्रेयस तलपड़े) एक निम्न-मध्यमवर्गीय परिवार से आता है, जो अपने परिवार के साथ-साथ अपने सपनों का बोझ भी कंधे पर उठाए मेहनत किए जा रहा है। बचपन से ही क्रिकेटर बनने का सपना लिए प्रवीण की उम्र घर की जिम्मेदारियों में पहले 30 फिर 35 और अंतत: 41 साल हो जाती है, लेकिन इस उम्र में भी वो अपने सपने का पीछा नहीं छोड़ता।
इन वजहों से फिल्म देखने पर हो जाएंगे मजबूर
ये फिल्म न सिर्फ क्रिकेट प्रेमियों को पसंद आएगी बल्कि उन लोगों को भी अच्छी लगेगी जो बढ़िया कंटेंट की तलाश में हैं। श्रेयस तलपड़े एक मंझे हुए कलाकार है, उन्हें कॉमेडी, सीरियस या कोई भी किरदार निभाने में मुश्किल नहीं आती। अगर आपनी उनकी ‘इकबाल’ देखी है तो जरूर ये फिल्म भी पसंद आएगी। बढ़ती उम्र और परिवार की जिम्मेदारियों से लड़ते हुए क्या प्रवीण तांबे अपना सपना पूरा कर पाता है? फिल्म में ये देखना दिलचस्प है। प्रवीण तांबे का 2 घंटे 13 मिनट का ये सफर किसी के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। खास तौर पर मिडिल क्लास के बच्चों और युवाओं के लिए ऐसी फिल्म की जरूरत है।
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