>समाजवादी पार्टी से निष्कासित बाहुबली विधायक अभय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। 15 साल पुराने जानलेवा हमले के केस में उनके खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
>जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की डबल बेंच ने लखनऊ हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि दो जजों की अलग-अलग राय के बाद तीसरे जज द्वारा दिया गया बहुमत का फैसला अंतिम माना जाएगा।
>2010 का मामला, अब मिला न्याय
>यह मामला अयोध्या के महाराजगंज थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां विकास सिंह नामक व्यक्ति ने 2010 में अभय सिंह और उनके साथियों पर हथियारों से जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया था। कई सालों की सुनवाई के बाद यह केस अंबेडकरनगर कोर्ट में ट्रांसफर हुआ, जहां से 10 मई 2023 को सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।
>हाईकोर्ट में दो जजों की अलग राय, तीसरे ने दी राहत
>विकास सिंह ने इस फैसले को लखनऊ हाईकोर्ट में चुनौती दी। केस की सुनवाई के दौरान जस्टिस एआर मसूदी ने अभय सिंह को दोषी मानते हुए 3 साल की सजा सुनाई, जबकि जस्टिस अजय कुमार श्रीवास्तव ने उन्हें बेकसूर ठहराया। मामला तीसरे जज जस्टिस राजन राय के पास पहुंचा, जिन्होंने 21 मार्च 2025 को अभियोजन पक्ष की दलीलों को अस्पष्ट और विरोधाभासी मानते हुए अभय सिंह को निर्दोष करार दिया।
>सुप्रीम कोर्ट में भी राहत, याचिका खारिज
>लखनऊ हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने यह कहकर खारिज कर दिया कि तीन जजों की सुनवाई के बाद मामला दोबारा खोलना उचित नहीं है।
>राजनीतिक हलचल तेज, भाजपा में एंट्री लगभग तय!
>अभय सिंह की गिनती यूपी के प्रभावशाली और बागी नेताओं में होती है। फरवरी 2024 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के खिलाफ जाकर बीजेपी प्रत्याशी को राज्यसभा चुनाव में वोट दिया था। इसके बाद पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया। अब सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिलने के बाद उनकी भाजपा में एंट्री की राह लगभग साफ मानी जा रही है।
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