अम्बेडकरनगर। श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही अम्बेडकरनगर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों शिवभक्तों की संभावित आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने पूरे जनपद में विशेष निगरानी व्यवस्था लागू करते हुए अधिकारियों को लगातार भ्रमण कर हालात पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन के अनुसार इस वर्ष श्रावण मास 30 जुलाई से 28 अगस्त (रक्षाबंधन) तक रहेगा। इस दौरान विभिन्न पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर बड़ी संख्या में कांवड़िये जिले के प्रमुख शिवालयों और मंदिरों में भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। खासकर प्रत्येक सोमवार और अन्य प्रमुख धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और बेहतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए पूरे जनपद को 09 जोन में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जोन में एक-एक जोनल मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है। इसके अलावा 78 सेक्टर मजिस्ट्रेट और 09 स्टैटिक मजिस्ट्रेट भी विभिन्न संवेदनशील स्थलों पर तैनात रहेंगे।
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सभी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर कानून-व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात संचालन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
श्रावण मास और कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति या सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम स्थापित किया है। कंट्रोल रूम में अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी तीन पालियों में लगाई गई है ताकि हर समय त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा सके। श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर 7376113790 तथा नोडल अधिकारी का संपर्क नंबर 9161432808 भी जारी किया गया है।
जिला प्रशासन ने कांवड़ यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा और यातायात संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करें। यदि किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या आपात स्थिति दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत कंट्रोल रूम अथवा निकटतम पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
श्रावण मास के दौरान भगवान शिव के मंदिरों में जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और कांवड़िये विभिन्न मार्गों से गुजरते हैं। इसी कारण प्रशासन हर वर्ष सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष कार्ययोजना तैयार करता है, जिससे धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सकें।
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