>पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर अपने तीखे बयानों के चलते चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने बिहार एडीजी के विवादित बयान, छांगुर धर्मांतरण केस और वामपंथियों के ऐतिहासिक दृष्टिकोण पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर देश की आत्मा को कमजोर करने का काम किया गया है।
>छांगुर केस पर व्यंग्य, “इतने महान व्यक्ति निकले?”
>अवैध धर्मांतरण के मामले में फंसे छांगुर को लेकर बृजभूषण ने तंज भरे लहजे में कहा, "मैं भी नहीं जानता था कि छांगुर भाई इतने महान व्यक्ति हैं! जब हम खुद उस इलाके से सांसद थे, तब भी उनका नाम कभी नहीं सुना। अब जांच में उनका नाम आ रहा है, तो समझ में आ रहा है कि फोटो तो किसी के साथ भी आ सकती है।"
>उन्होंने व्यंग्यात्मक ढंग से यह भी कहा कि आजकल सोशल मीडिया की दुनिया में कोई भी व्यक्ति “महान” साबित हो सकता है।
>बिहार एडीजी के बयान का बचाव: "गर्मी में गुस्सा बढ़ता है, ठंड में डकैती"
>बिहार के पटना में हुए गोलीकांड के बाद एडीजी द्वारा दिए गए बयान पर बृजभूषण शरण सिंह ने सहमति जताते हुए कहा, "मैं समाजशास्त्र का छात्र रहा हूं। गर्मियों में निर्माण कार्य तेज़ होता है, लोग चिड़चिड़े हो जाते हैं। यही कारण है कि आपराधिक घटनाएं गर्मियों में ज्यादा होती हैं। वहीं ठंड की रातें डकैती के लिए मुफीद होती हैं। शायद एडीजी का आशय यही था।"
>अकबर महान? अंग्रेजों और वामपंथियों पर तीखा हमला
>बृजभूषण ने भारतीय इतिहास की तथाकथित “गलत व्याख्या” पर वामपंथी इतिहासकारों और अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा:“इतिहास में जहां एक ओर अकबर को ‘महान’ बताया गया, वहीं स्वतंत्रता सेनानियों को डकैत करार दिया गया। यह सुनियोजित षड्यंत्र था, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने असली नायकों को पहचान ही न सकें।”
>उन्होंने आरोप लगाया कि वामपंथी विचारधारा और अंग्रेजों ने इतिहास के सच को मिटाने की कोशिश की है। "किसी को समाप्त करना है तो उसका इतिहास मिटा दो यही फार्मूला अपनाया गया।"
>धर्म-जाति की राजनीति करने वालों पर कटाक्ष
>धर्म और जाति के नाम पर राजनीति करने वालों को भी पूर्व सांसद ने निशाने पर लिया। उन्होंने कहा,"जिनका अस्तित्व समाप्त हो चुका है, वही अब धर्म और जाति की आड़ लेकर अपनी पहचान बनाने में लगे हैं।"
>उन्होंने आगे कहा कि अब कोई भी राष्ट्रपति के निवास पर भोजन से इनकार नहीं करेगा, समय बदल चुका है।
>जनवरी में कथा, सभी का स्वागत - राहुल या चंद्रशेखर को भी मंच
>अपने निजी कॉलेज नंदिनी नगर में जनवरी 2026 में होने वाली कथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा:"हमारी कथा में अगर राहुल गांधी या चंद्रशेखर आएंगे, तो उन्हें विशिष्ट मंच दिया जाएगा। हम राजनीति से ऊपर उठकर सामाजिक और आध्यात्मिक समरसता को बढ़ावा देना चाहते हैं।"
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