>उत्तर प्रदेश में जल संकट से निपटने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक नई पहल की रूपरेखा प्रस्तुत की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ की तर्ज पर अब चेकडैम, तालाब और ब्लास्टकूप निर्माण को जनआंदोलन का रूप देना होगा। उन्होंने कहा कि ये केवल पानी रोकने की व्यवस्था नहीं, बल्कि समेकित जल प्रबंधन का सशक्त साधन हैं, जो बड़े बांधों की तुलना में अधिक किफायती और प्रभावशाली हैं।
>मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में बताया कि प्रदेश में अब तक 6,448 चेकडैम बन चुके हैं, जिससे 1,28,960 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता और हर साल 10,000 हेक्टेयर मीटर भूजल रिचार्ज सुनिश्चित हो रहा है। इसके अलावा, 16,610 तालाबों में से 1,343 का जीर्णोद्धार किया गया और 6,192 ब्लास्टकूप से 18,576 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित हुई है। मुख्यमंत्री ने कुम्हारों को निर्देश दिए कि 1 अप्रैल से 15 जून तक तालाब से मुफ्त मिट्टी निकालने की सुविधा दी जाए, जिससे वर्षा जल संचयन और रिचार्ज प्रक्रिया सुचारू हो सके।
>रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर भी विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 100 वर्ग मीटर से बड़े सभी भवनों में यह अनिवार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में 82 अतिदोहित और 47 क्रिटिकल क्षेत्र थे, जो अब क्रमशः 50 और 45 रह गए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर जिले में चेकडैम, तालाब और ब्लास्टकूप की फोटोग्राफिक डॉक्यूमेंटेशन कराई जाए और जनता को जागरूक किया जाए।
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