भारतीय शेयर बाजार में निवेश का संतुलन तेजी से बदल रहा है। लंबे समय तक बाजार की दिशा तय करने वाले विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की तुलना में अब घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की जुलाई 2026 की इंडिया स्ट्रैटेजी रिपोर्ट के अनुसार, निफ्टी 500 कंपनियों में डीआईआई की हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 21 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जबकि एफआईआई की हिस्सेदारी घटकर 17 प्रतिशत रह गई है।
यह लगातार नौवीं तिमाही है जब घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट बताती है कि भारतीय निवेशकों की बढ़ती भागीदारी अब शेयर बाजार को नई मजबूती दे रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 22 महीनों के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब 58 अरब अमेरिकी डॉलर की शुद्ध निकासी की। इसके बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों ने रिकॉर्ड 166 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया, जिससे बाजार पर विदेशी बिकवाली का असर काफी हद तक संतुलित रहा।
इस दौरान नियमित एसआईपी निवेश भी बाजार की मजबूती का बड़ा आधार बना। औसतन हर महीने करीब 3 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश एसआईपी के जरिए आया, जिसने बाजार में लगातार तरलता बनाए रखी।
घरेलू संस्थागत निवेशकों ने निफ्टी 500 के कुल 24 क्षेत्रों में से 19 क्षेत्रों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। सबसे अधिक बढ़ोतरी जिन क्षेत्रों में देखने को मिली, उनमें निजी बैंक, दूरसंचार, रियल एस्टेट, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, बीमा, ऑटोमोबाइल, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां, खुदरा कारोबार, पूंजीगत सामान शामिल हैं
वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी अधिकांश क्षेत्रों में अपनी हिस्सेदारी कम की, हालांकि धातु, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां, पूंजीगत सामान और लॉजिस्टिक्स जैसे चुनिंदा क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया।
रिपोर्ट के अनुसार बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (बीएफएसआई) दोनों तरह के संस्थागत निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा क्षेत्र बना हुआ है। एफआईआई के कुल निवेश में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 34.6 प्रतिशत रही, जबकि डीआईआई के पोर्टफोलियो में यह हिस्सेदारी 29.4 प्रतिशत तक पहुंचकर रिकॉर्ड स्तर पर रही। इसके बाद ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता क्षेत्र, पूंजीगत सामान, स्वास्थ्य सेवा तथा तेल एवं गैस प्रमुख निवेश विकल्प बने रहे।
घरेलू संस्थागत निवेशकों का भरोसा केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट बताती है कि बड़ी, मझोली और छोटी—तीनों श्रेणी की कंपनियों में डीआईआई की हिस्सेदारी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
निफ्टी 500 की 73 प्रतिशत कंपनियों में डीआईआई ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई, जबकि एफआईआई ने 59 प्रतिशत कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई। वहीं निफ्टी 50 की 82 प्रतिशत कंपनियों में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने निवेश बढ़ाया, जबकि विदेशी निवेशकों ने 72 प्रतिशत कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम की।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की लगातार बढ़ती भागीदारी भारतीय पूंजी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। नियमित एसआईपी निवेश, म्यूचुअल फंड में बढ़ती भागीदारी और लंबी अवधि के निवेश की प्रवृत्ति ने बाजार को पहले की तुलना में अधिक स्थिर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारतीय शेयर बाजार अब विदेशी निवेशकों पर पहले की तुलना में कम निर्भर होता जा रहा है और घरेलू पूंजी बाजार की मजबूती लगातार बढ़ रही है।
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