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जिस सड़क से रोज गुजरते हैं लाखों लोग, उसके विकास पर लगा ब्रेक - एनएचएआई ने बंद की पूरी कवायद

ज्ञानी बॉर्डर से लाल कुआं तक लगभग 18 किलोमीटर लंबे जीटी रोड को एनएचएआई को सौंपने की वर्षों पुरानी योजना बंद हो गई है। प्राधिकरण ने शहरी क्षेत्र, भारी भूमि अधिग्रहण और बहु-विभागीय समन्वय की चुनौतियों का हवाला देते हुए प्रस्ताव स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
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Bureau News Desk
31 Jul 2026
09:50 AM
1 min read
जिस सड़क से रोज गुजरते हैं लाखों लोग, उसके विकास पर लगा ब्रेक - एनएचएआई ने बंद की पूरी कवायद
हाइलाइट्स
ज्ञानी बॉर्डर से लाल कुआं तक जीटी रोड का एनएचएआई को हैंडओवर नहीं होगा।
चौड़ीकरण और आधुनिकीकरण की योजना पर फिलहाल विराम लग गया।
एनएचएआई ने शहरी क्षेत्र और भूमि अधिग्रहण की चुनौतियों का हवाला दिया।
सड़क की देखरेख पहले की तरह पीडब्ल्यूडी करेगा।

गाजियाबाद। दिल्ली और गाजियाबाद के बीच रोजाना लाखों लोगों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग माने जाने वाले ज्ञानी बॉर्डर से लाल कुआं तक जीटी रोड के विकास को बड़ा झटका लगा है। वर्षों से इस सड़क को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को सौंपने की कवायद चल रही थी, लेकिन अब इस योजना पर फिलहाल विराम लग गया है। एनएचएआई ने नियमों और व्यावहारिक चुनौतियों का हवाला देते हुए इस मार्ग का हैंडओवर लेने से इनकार कर दिया है।

इस फैसले के साथ ही सड़क के चौड़ीकरण, आधुनिकीकरण और संभावित एलिवेटेड मार्ग जैसी योजनाओं के जल्द शुरू होने की उम्मीद भी कमजोर पड़ गई है। अब सड़क का रखरखाव और मरम्मत पहले की तरह पीडब्ल्यूडी के जिम्मे ही रहेगी।

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इस सड़क को एनएचएआई के अधीन लाने की पहल पूर्व सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री जनरल वी.के. सिंह के कार्यकाल में शुरू हुई थी। उनका मानना था कि सीमित संसाधनों वाले पीडब्ल्यूडी की तुलना में एनएचएआई इस व्यस्त मार्ग का अधिक प्रभावी ढंग से विकास कर सकेगा।

इसके बाद कई दौर की बैठकों और विभागीय पत्राचार के जरिए प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया। वर्तमान सांसद अतुल गर्ग ने भी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से कई बार मुलाकात कर इस मामले को आगे बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन आखिरकार प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता रामराजा के अनुसार, जीटी रोड के हैंडओवर से जुड़ी कागजी प्रक्रिया अब बंद कर दी गई है।

एनएचएआई के अनुसार यह मार्ग उसके मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का हिस्सा नहीं है। इसके अलावा यह सड़क पूरी तरह विकसित शहरी क्षेत्र से होकर गुजरती है, जहां दोनों ओर घनी आबादी, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, सर्विस लेन, बिजली और पानी की लाइनें समेत कई सरकारी ढांचे मौजूद हैं।

प्राधिकरण का मानना है कि भविष्य में यदि सड़क का चौड़ीकरण या बड़े स्तर पर निर्माण कार्य किया जाता है तो बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण, अतिक्रमण हटाने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जैसी जटिल चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इन्हीं कारणों से एनएचएआई ने इस परियोजना को अपने अधीन लेने में रुचि नहीं दिखाई।

अधिकारियों के अनुसार यदि सड़क एनएचएआई को सौंप दी जाती तो पूरे मार्ग का व्यापक कायाकल्प किया जा सकता था। प्रस्तावित योजनाओं में सड़क का पुनर्निर्माण, बेहतर जल निकासी व्यवस्था, आधुनिक स्ट्रीट लाइट, सर्विस रोड का विकास, फुटपाथ, हरित पट्टी, सुरक्षित यू-टर्न, नई रेलिंग और सड़क सुरक्षा से जुड़े कई आधुनिक सुधार शामिल थे।

इसके अलावा यातायात दबाव वाले हिस्सों में फ्लाईओवर, अंडरपास या अन्य इंजीनियरिंग समाधान तैयार करने की भी संभावना थी। नियमित मशीन आधारित रखरखाव और निगरानी भी एनएचएआई के मानकों के अनुरूप की जा सकती थी।

ज्ञानी बॉर्डर से लाल कुआं तक करीब 18 किलोमीटर लंबा जीटी रोड गाजियाबाद के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में गिना जाता है। यह सड़क दिल्ली सीमा, साहिबाबाद, मोहननगर, राजेंद्र नगर, हिंडन क्षेत्र, पुराना बस अड्डा, घंटाघर और लाल कुआं जैसे प्रमुख इलाकों को जोड़ती है।

यातायात विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार इस मार्ग से प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख से अधिक वाहन गुजरते हैं। इनमें निजी वाहन, बसें, ट्रक, स्कूल वाहन और मालवाहक वाहन शामिल हैं। यात्रियों की संख्या के हिसाब से प्रतिदिन चार से पांच लाख लोग इस सड़क का उपयोग करते हैं।

हालांकि एनएचएआई ने फिलहाल हैंडओवर का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया है, लेकिन जनप्रतिनिधियों की ओर से इस दिशा में प्रयास जारी रहने की बात कही जा रही है। फिलहाल सड़क की मरम्मत, रखरखाव और अन्य कार्यों की जिम्मेदारी पहले की तरह पीडब्ल्यूडी के पास ही रहेगी।

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