उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद मौजूदा ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के शासनादेश को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने सरकार के इस निर्णय को चुनौती देते हुए दावा किया है कि पंचायत चुनाव से पहले ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करना नियमों और पूर्व की प्रशासनिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष शासनादेश और संबंधित कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किया गया। न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। उपलब्ध न्यायालयीय अभिलेखों के अनुसार अब इस मामले की सुनवाई 3 जून को होगी।
क्या है पूरा मामला?
पंचायती राज विभाग की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार नई ग्राम पंचायतों के गठन और उनकी पहली बैठक होने तक अथवा अधिकतम छह माह की अवधि तक, जो भी पहले हो, वर्तमान ग्राम प्रधानों को ग्राम पंचायतों में प्रशासक के रूप में कार्य करने की अनुमति दी जाएगी। सरकार ने यह निर्णय पंचायतों के प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे ग्राम प्रधान कोई नीतिगत निर्णय नहीं लेंगे। विशेष परिस्थितियों में नीतिगत प्रस्ताव जिलाधिकारी की स्वीकृति के बाद ही लागू किए जा सकेंगे।
जनहित याचिका में दावा किया गया है कि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक जिम्मेदारी वर्तमान प्रधानों को देने के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी जानी चाहिए थी। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि पूर्व में ऐसे मामलों में प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदारी दिए जाने की व्यवस्था अपनाई जाती रही है। याचिका में सरकार के हालिया निर्णय पर सवाल उठाते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
यह जनहित याचिका ओम प्रकाश प्रजापति की ओर से दाखिल की गई है। मामले में राज्य सरकार, पंचायती राज विभाग तथा अन्य पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है। न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध विवरण के अनुसार याचिका का पंजीकरण 27 मई 2026 को हुआ था। मामले की पहली सुनवाई 29 मई को सूचीबद्ध हुई और बाद में इसे अगली सुनवाई के लिए सूची में शामिल किया गया।
उपलब्ध न्यायालयीय आदेश के अनुसार मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अभधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ के समक्ष हुई। अदालत ने राज्य सरकार के अनुरोध पर मामले को 3 जून 2026 की फ्रेश लिस्ट में सुनवाई के लिए लगाने का निर्देश दिया है। अब अगली सुनवाई में राज्य सरकार अपना पक्ष रख सकती है।
FAQs
प्रश्न 1: ग्राम प्रधानों को प्रशासक क्यों बनाया गया है?
उत्तर: नई ग्राम पंचायतों के गठन तक प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए।
प्रश्न 2: क्या प्रशासक बने ग्राम प्रधान नीतिगत फैसले ले सकते हैं?
उत्तर: शासनादेश के अनुसार उन्हें नीतिगत निर्णय लेने की अनुमति नहीं है।
प्रश्न 3: इस मामले में याचिका किसने दायर की है?
उत्तर: न्यायालयीय रिकॉर्ड के अनुसार ओम प्रकाश प्रजापति द्वारा जनहित याचिका दायर की गई है।
प्रश्न 4: अगली सुनवाई कब होगी?
उत्तर: उपलब्ध आदेश के अनुसार 3 जून 2026 को।
प्रश्न 5: क्या हाईकोर्ट ने अभी कोई अंतिम फैसला दिया है?
उत्तर: नहीं, मामला अभी विचाराधीन है और अंतिम निर्णय आना बाकी है।
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