मिडिल ईस्ट में जारी ईरान से जुड़ा संघर्ष अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डालने लगा है। ऊर्जा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले हफ्तों में वैश्विक आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार मिडिल ईस्ट में तनाव को चार सप्ताह से अधिक समय हो चुका है और स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। अमेरिका की ओर से पेश शांति प्रस्ताव को ईरान द्वारा खारिज किए जाने के बाद तनाव कम होने की संभावना फिलहाल तो नजर नहीं आ रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस संकट का सबसे बड़ा असर हॉर्मुज स्ट्रेट पर पड़ रहा है, जहां से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल के जहाज अपने देश के लिए गुजरते है। इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार को सीधे प्रभावित कर सकती है।
ऊर्जा अर्थशास्त्री अनस अल्हाजी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि स्थिति ऐसी ही रही, तो कुछ ही हफ्तों में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके गंभीर प्रभाव दिखाई देने लगेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि तेल आपूर्ति में बाधा से ऊर्जा संकट बहुत ज़्यादा गहराएगा और बाजारों में अस्थिरता बढ़ेगी।
If this war doesn't end soon, the global economy would collapse by early May. https://t.co/MV8z99nN6j
— Anas Alhajji (@anasalhajji) March 25, 2026
एशियाई बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि तनाव जारी रहा, तो कीमतों में उछाल और भी ज़्यादा आ सकता है, जिससे महंगाई और उत्पादन लागत पर बहुत भयावर असर पड़ेगा ।
यूरोप में भी ऊर्जा संकट के गहराने की आशंका जताई गई है, जहां वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की कमी के चलते पुराने आपूर्ति स्रोतों पर निर्भरता बढ़ सकती है।
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