राहुल गांधी पर गरजे जगदंबिका पाल - न सदन में रुचि, न मुद्दों में दिलचस्पी

News Desk 22 Jul 2025, 03:16 AM 1 min read
राहुल गांधी पर गरजे जगदंबिका पाल - न सदन में रुचि, न मुद्दों में दिलचस्पी


>लोकसभा में मानसून सत्र की शुरुआत होते ही एक बार फिर सियासी तापमान चढ़ गया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा सदन में उन्हें बोलने नहीं दिए जाने के आरोपों पर बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि “राहुल गांधी न तो बोलने में रुचि रखते हैं, न ही सदन चलाने में। वे केवल नाम के नेता प्रतिपक्ष हैं।”


>जगदंबिका पाल ने विपक्ष के रवैये पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि कांग्रेस और उनके सहयोगी दल मुद्दों से भटकाकर केवल हंगामा करने की राजनीति कर रहे हैं। पाल के अनुसार, यदि राहुल गांधी वाकई में जनहित के विषयों पर चर्चा चाहते, तो अपने सांसदों को अनुशासन में रखकर शून्यकाल में अपनी बात रखते।


>"सदन नहीं, सिर्फ ड्रामा में रुचि है राहुल को"


>मानसून सत्र के पहले दिन राहुल गांधी ने सदन में कहा कि उन्हें बोलने से रोका जा रहा है, जिस पर जगदंबिका पाल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा: “आपके सदस्य हंगामा नहीं करेंगे तो मैं खुद उन्हें बोलने का मौका दूंगा। लेकिन आपके इशारे पर सदन बाधित किया जाता है। ऐसा लगता है कि विपक्ष को सिर्फ कैमरे के सामने ड्रामा करना आता है, न कि संसद में सार्थक बहस करना।”


>उन्होंने कहा कि संसदीय कार्यमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष खुद विपक्ष से सदन सुचारु रूप से चलाने की अपील कर चुके हैं, लेकिन विपक्ष की रणनीति सिर्फ अवरोध और नारेबाजी की है।


>जगदंबिका पाल ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की सेना ने दुनिया को अपना पराक्रम दिखाया, लेकिन विपक्ष के पास इस पर कहने को कुछ नहीं था। उन्होंने कहा: "जब देश की सेना ने मात्र 22 मिनट में लक्ष्य पूरा कर लिया, तब विपक्ष अगर सच में राष्ट्रहित में सोचता, तो इसे लेकर प्रधानमंत्री की सराहना करता। लेकिन उनके पास कोई ठोस एजेंडा नहीं है, इसलिए वे सदन को बाधित करते हैं।"


>जगदंबिका पाल ने स्वामी प्रसाद मौर्य के बयानों पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने श्रावण मास में भगवान शिव के भक्तों को “गुंडा और अराजक तत्व” कहे जाने को लेकर मौर्य को "मानसिक रूप से दिवालिया और विक्षिप्त" बताया - “वे हिन्दू धर्म में जन्म लेकर अब उसी धर्म को अपमानित कर रहे हैं। भगवान शिव और उनके भक्तों के लिए आपत्तिजनक बातें करना न सिर्फ निंदनीय है बल्कि असहनीय भी। ऐसे व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

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