भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई ने लखनऊ में पुलिस कमिश्नर को शिकायती पत्र सौंपकर कंगना रनौत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नई दिल्ली में नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों, युवाओं और महिलाओं को लेकर सांसद ने सार्वजनिक मंच से आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।
महिला कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष अनामिका यादव के नेतृत्व में सौंपे गए शिकायती पत्र में पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है।
शिकायत के अनुसार, हाल ही में नई दिल्ली में नीट पेपर लीक के विरोध में छात्र-छात्राएं, युवा और विभिन्न संगठनों के लोग प्रदर्शन कर रहे थे। महिला कांग्रेस का आरोप है कि इसी दौरान भाजपा सांसद कंगना रनौत ने प्रदर्शनकारियों के लिए कथित तौर पर "नशेड़ी" और "घुसपैठिया" जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
संगठन का कहना है कि इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज करा रहे लोगों, विशेषकर युवाओं और महिलाओं, के प्रति अपमानजनक है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है।
महिला कांग्रेस ने पुलिस कमिश्नर को दिए गए शिकायती पत्र में मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाए।
संगठन ने यह भी अनुरोध किया है कि मामले से जुड़े वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए, ताकि जांच के दौरान सभी उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण किया जा सके।
शिकायती पत्र सौंपने के बाद महिला कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष अनामिका यादव ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में जनप्रतिनिधियों को संयमित और जिम्मेदार भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध-प्रदर्शन कर रहे नागरिकों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है और इससे समाज के विभिन्न वर्गों की भावनाएं भी आहत होती हैं।
महिला कांग्रेस ने पुलिस प्रशासन से पूरे प्रकरण में त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि शिकायत की निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुरूप आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। संगठन का कहना है कि यदि किसी सार्वजनिक टिप्पणी से कानून व्यवस्था या सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका हो, तो उसकी विधिक समीक्षा आवश्यक है।
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