>लखनऊ। सावन में निकलने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर जहां एक ओर सरकार व्यवस्थाओं का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर इस यात्रा से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त होने की शिकायतें भी तेज़ होती जा रही हैं। इसी क्रम में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौलाना कौसर हयात खान ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कांवड़ यात्रा में हो रहे अराजक व्यवहार, मीट की दुकानों पर प्रतिबंध और आम नागरिकों की समस्याओं को लेकर गहरी चिंता जताई है।
>धार्मिक आस्था या अराजकता?
>मौलाना कौसर हयात खान ने पत्र में लिखा है कि कांवड़ यात्रा को धार्मिक आयोजन के बजाय अब कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा “उत्पात का आयोजन” बना दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांवड़ियों द्वारा मामूली बातों पर मारपीट, गाड़ियों को क्षति पहुंचाना, ढाबों और दुकानों पर तोड़फोड़ जैसी घटनाएं आम हो चुकी हैं और ये सब पुलिस की मौजूदगी में हो रहा है।
>मीट की दुकानों पर प्रतिबंध से बढ़ी बेरोजगारी
>पत्र में मौलाना ने खास तौर पर यह मुद्दा उठाया कि कांवड़ यात्रा के दौरान मीट की दुकानों और होटलों पर लगाया गया प्रतिबंध लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी पर सीधा प्रहार है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब शराब की दुकानें खुली रह सकती हैं तो सिर्फ मीट व्यवसाय को क्यों निशाना बनाया जा रहा है?
>आम जनता की ज़िंदगी में अव्यवस्था
>मौलाना ने यह भी कहा कि यात्रा के दौरान मुख्य सड़कों और मार्गों पर प्रतिबंध लगाने से आम लोगों को ट्रैफिक जाम, समय की बर्बादी और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। छोटी-छोटी यात्राओं में आम जनता को अधिक समय और धन खर्च करना पड़ रहा है।
>मुख्यमंत्री और डीजीपी को भी लिखा पत्र, पर कोई असर नहीं
>मौलाना कौसर हयात ने बताया कि उन्होंने 15 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और 1 अगस्त 2024 को यूपी पुलिस महानिदेशक को भी पत्र लिखा था, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
>मौलाना की मुख्य मांगें:
>मुख्य सड़कों के बजाय वैकल्पिक मार्ग (कॉरिडोर) से कांवड़ यात्रा संचालित हो।
>मीट की दुकानों और होटलों पर से प्रतिबंध हटाया जाए।
>कांवड़ यात्रा में हिंसा और संपत्ति नुकसान पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो।
>आम नागरिकों व दुकानदारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
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>कांवड़ियों के उत्पात से हुए नुकसान की सरकार मुआवजा दे।
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