>उत्तर भारत के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में से एक KGMU (किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी) इस समय भ्रष्टाचार और टेंडर घोटाले के आरोपों से घिर गया है। दो वरिष्ठ डॉक्टरों पर पीपीपी मोड के टेंडर में अपने रिश्तेदार के नाम से फर्जी कंपनी बनाकर करोड़ों की हेराफेरी करने का गंभीर आरोप लगा है।
>इस मामले ने और तूल तब पकड़ा जब कंपनी के एक पूर्व साझेदार सदस्य ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को इसकी लिखित शिकायत भेज दी। राजभवन की ओर से कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद को पत्र भेजकर मामले की जांच रिपोर्ट मांगी गई है।
क्या है पूरा मामला?
>सूत्रों के अनुसार, KGMU में PPP (पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप) मोड पर ओपीडी और ट्रॉमा सेंटर में सीटी स्कैन, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और ईसीजी मशीनें लगाने के लिए टेंडर प्रक्रिया चलाई गई थी। इसी दौरान, दो वरिष्ठ डॉक्टरों ने अपने रिश्तेदार के नाम से एक कंपनी बनाई और उसमें आशियाना निवासी वीरेंद्र सिंह से 1.13 करोड़ रुपये निवेश कराए।
>रकम को हजरतगंज स्थित बैंक में एक चालू खाता खोलकर जमा कराया गया। लेकिन कुछ ही समय बाद पैसे के बंटवारे को लेकर विवाद खड़ा हो गया। डॉक्टरों ने वीरेंद्र सिंह को कंपनी से बाहर कर दिया और 2 मई 2025 को खाते से पैसे निकालने पर रोक लगा दी।
>वीरेंद्र सिंह ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से की। 4 अगस्त को राज्यपाल कार्यालय के OSD डॉ. पंकज एल. जानी ने कुलपति को पत्र भेजकर तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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