लखनऊ के अलीगंज स्थित अग्निकांड के बाद अब प्रशासनिक और जांच स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात हुई हाई लेवल बैठक के बाद मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय एसआईटी का गठन कर दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हादसे के कारणों की गहन जांच की जाए, जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए और सात दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाए।
इस बहुचर्चित मामले की जांच के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।
- अमृत अभिजात, अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, धर्मार्थ एवं संस्कृति विभाग
- प्रवीण कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी), लखनऊ जोन
सरकार की ओर से गठित यह विशेष जांच दल हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करेगा।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की। बैठक में राहत कार्य, घायलों के उपचार और जांच की दिशा को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इस हादसे की तह तक जाकर कारणों का पता लगाया जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
घटना के बाद कई सवाल चर्चा में हैं।
- आखिर आग कैसे लगी?
- सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं?
- इमारत के लिए जारी एनओसी की प्रक्रिया क्या थी?
- क्या आपातकालीन निकास की पर्याप्त व्यवस्था थी?
- क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई?
इन सभी पहलुओं की जांच अब एसआईटी के दायरे में रहेगी।
अग्निकांड के बाद रक्षा मंत्री और लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह भी घटनास्थल पहुंचे। उनके साथ उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने अधिकारियों से राहत और बचाव कार्य की स्थिति की जानकारी ली और घटनास्थल का जायजा लिया।
घटना के बाद पूरे प्रशासनिक अमले की सक्रियता बढ़ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही घटनास्थल का दौरा कर चुके हैं। डीजीपी राजीव कृष्ण, प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। इस बीच सरकार का फोकस एक ओर जहां घायलों के बेहतर उपचार पर है, वहीं दूसरी ओर हादसे के पीछे की वजहों का पता लगाने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने पर भी है।
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