राजधानी लखनऊ में अवैध कब्जों और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नगर निगम के जोन ४ स्थित एक अवैध कब्जे वाले द्वारा जारी एक नोटिस में संबंधित पक्ष को 15 दिनों के भीतर सरकारी भूमि से अवैध कब्जा हटाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन नोटिस जारी होने के 27 दिन बाद भी मौके पर कोई कार्रवाई नहीं होने से स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सोशल मीडिया और स्थानीय लोगों के बीच यह मामला अब चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि जब नगर निगम ने स्वयं नोटिस जारी कर अतिक्रमण को अवैध माना था, तो तय समय सीमा समाप्त होने के बाद भी बुलडोजर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। वहीं कुछ लोग इसे प्रशासनिक लापरवाही तो कुछ संभावित मिलीभगत से जोड़कर देख रहे हैं।
नगर निगम लखनऊ की ओर से जारी नोटिस के अनुसार यह मामला जोन-04 क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। नोटिस में उल्लेख किया गया है कि संबंधित भूमि सरकारी श्रेणी में दर्ज है और उस पर अवैध कब्जा किया गया है। दस्तावेज में यह भी कहा गया कि कब्जाधारी को 15 दिन के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए जाते हैं, अन्यथा नगर निगम अपने स्तर से कार्रवाई करेगा और खर्च भी संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा।
लेकिन निर्धारित अवधि समाप्त हुए कई दिन बीत चुके हैं, और अभी तक मौके पर किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई है । इससे नगर निगम की कार्रवाई प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार संबंधित भूमि को लेकर क्षेत्र में पहले भी विवाद की स्थिति बनी रही है। वहीं नगर निगम की ओर से नोटिस जारी होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि तय समय सीमा के भीतर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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