उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में न्यायपालिका की ओर से पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर एक अनोखी पहल देखने को मिली। अदालत परिसर में आयोजित विशेष अभियान के तहत न्यायाधीशों, न्यायिक अधिकारियों और वकीलों ने सरकारी और निजी वाहनों का उपयोग छोड़कर साइकिल और ई-रिक्शा से अदालत पहुंचकर समाज को सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया।
इस विशेष मुहिम की शुरुआत माननीय न्यायमूर्ति जस्टिस राजेश चौहान की मौजूदगी में हुई। उन्होंने स्वयं उपस्थित होकर साइकिल से अदालत जाने वाले न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों के काफिले को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अदालत परिसर में इस पहल को लेकर उत्साह और जागरूकता का माहौल देखने को मिला।
अभियान के दौरान लगभग 70 न्यायाधीश और न्यायिक अधिकारी एक साथ साइकिल चलाते हुए अदालत पहुंचे। इस दौरान बार एसोसिएशन से जुड़े वकीलों और अदालत कर्मचारियों ने भी इस पहल में सक्रिय भागीदारी निभाई। कई अधिवक्ता साइकिल से अदालत पहुंचे, जबकि कुछ ने ई-रिक्शा जैसे पर्यावरण अनुकूल साधनों का उपयोग किया। अदालत परिसर में सामान्य दिनों की तुलना में निजी वाहनों की संख्या कम दिखाई दी।
इस अवसर पर जस्टिस राजेश चौहान ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य शहर में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ ईंधन की बचत और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि व्यस्त जीवनशैली के बीच नियमित शारीरिक गतिविधियां स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं और समाज के हर वर्ग को पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
न्यायपालिका की इस पहल को आम लोगों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने सराहनीय कदम बताया है। शहर में लगातार बढ़ते प्रदूषण और यातायात दबाव के बीच अदालत से जुड़ी इस मुहिम को सामाजिक जागरूकता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत परिसर में मौजूद लोगों ने इसे न्यायपालिका की सकारात्मक सामाजिक भागीदारी का उदाहरण बताया।
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