>राजधानी के बड़ा इमामबाड़ा स्थित आसिफी मस्जिद में शुक्रवार को जुमा की नमाज़ के बाद शिया समुदाय ने ज़बरदस्त प्रदर्शन किया। शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद की अगुआई में हुए इस विरोध में अमेरिका और इज़राइल की नीतियों की कड़ी आलोचना की गई और भारत सरकार की मौन भूमिका पर भी नाराज़गी जताई गई।
>प्रदर्शन के दौरान मौलाना जव्वाद ने कहा, “हम अपने हिंदुस्तान से शर्मिंदा हैं, जो इज़राइल का समर्थन कर रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अमेरिका के साथ खड़ा है, जो खुद इज़राइल को हथियार देकर फलस्तीन में नरसंहार को बढ़ावा दे रहा है।
>प्रदर्शनकारियों ने डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू की तस्वीरें जलाईं और ‘अमेरिका-इज़राइल मुर्दाबाद’ के नारे लगाए। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे लोगों के हाथों में ‘I Stand with Iran’, ‘Trump Murdabad’ और ‘Ayatollah Khamenei Zindabad’ जैसे पोस्टर थे।
इज़राइल को बताया ‘आतंकवादी राष्ट्र’
>मौलाना जव्वाद ने कहा, “इज़राइल और अमेरिका आतंकवाद फैला रहे हैं। अमेरिका हथियार सप्लाई कर रहा है और इज़राइल गाजा में मासूमों का खून बहा रहा है। 65,000 से अधिक फलस्तीनी अब तक मारे जा चुके हैं। स्कूल, अस्पताल, रिहायशी इलाकों को बमबारी में तबाह किया जा रहा है। जो जिंदा हैं, वे भूख से तड़प रहे हैं।”
>उन्होंने भारत सरकार से स्पष्ट रूप से मांग की कि “इज़राइल का विरोध किया जाए और ईरान के साथ खड़ा हुआ जाए।”
भारतीयों को एयरलिफ्ट करने की मांग
>मौलाना ने केंद्र सरकार से अपील की कि ईरान और इराक में फंसे भारतीय नागरिकों – विशेष रूप से छात्र, तीर्थयात्री और नौकरीपेशा लोगों – को जल्द एयरलिफ्ट करके देश वापस लाया जाए। उन्होंने बताया कि वह जल्द ही रक्षामंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह से मिलकर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।
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