राजधानी के आशियाना क्षेत्र स्थित श्री जगदम्बेश्वर शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का रविवार को श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ समापन हुआ। रविवार शाम को विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीमद् भागवत कथा का समापन संपन्न कराया गया। इसके उपरांत आयोजक रविन्द्र कुमार यादव की ओर से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें देर शाम तक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान मंदिर परिसर राधे-कृष्ण, जय श्रीराम और जय हनुमान के जयकारों से गूंजता रहा।
कथा के अंतिम दिन निरंजनी अखाड़ा से पधारी कथा वाचिका साध्वी सत्यप्रिया गिरी ने श्रद्धालुओं को कथा महिमा का सार सुनाते हुए मातृ-पितृ सेवा और सम्मान के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। कथा के दौरान साध्वी सत्यप्रिया गिरी ने अपने प्रवचनों में कहा कि माता-पिता की सेवा करना ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म और कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जिस परिवार में माता-पिता का सम्मान होता है, वहां सुख, शांति और समृद्धि का वास बना रहता है। उनके प्रेरणादायी विचारों को सुनने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा स्थल पूरे समय भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर दिखाई दिया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजन में शामिल अतिथियों और गणमान्य लोगों का पटका पहनाकर सम्मान भी किया गया। श्रद्धालुओं ने पूरे आयोजन को धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया। सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ बीते सोमवार को हुआ था, जिसका रविवार को पूर्ण श्रद्धा और उत्साह के साथ समापन हुआ। आयोजन के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए मंदिर पहुंचे। आयोजक रविन्द्र कुमार यादव ने कहा कि कथा आयोजन का उद्देश्य समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना तथा लोगों को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ना है।
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