>उत्तर प्रदेश में राजस्व विवादों के निस्तारण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त मॉनिटरिंग का असर अब साफ दिखने लगा है। त्वरित न्याय और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में उठाए गए कदमों का नतीजा यह है कि पूरे प्रदेश में रिकॉर्ड मामलों का निपटारा हुआ है। राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि अक्टूबर माह में लखनऊ जिले ने 15,260 मामलों का निस्तारण कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया, जबकि जनपद न्यायालय स्तर पर जौनपुर लगातार 13वें महीने भी टॉप पर रहा।
>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार हर माह जिलावार समीक्षा करते हैं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राजस्व विवादों को शीर्ष प्राथमिकता पर निपटाया जाए। उनका उद्देश्य न केवल आम जनता को त्वरित न्याय दिलाना है, बल्कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसंतोष को भी बढ़ावा देना है। इसी नीति के तहत जिला प्रशासन सक्रिय हुआ है और अक्टूबर माह में पूरे प्रदेश में कुल 3,24,897 राजस्व मामलों का निस्तारण किया गया है जो अब तक का एक बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है।
>लखनऊ की जिलाधिकारी विशाख जी. अय्यर के नेतृत्व में सबसे अधिक 15,260 मामलों का निस्तारण किया गया। इसके बाद प्रयागराज (10,501), गोरखपुर (8,165), कानपुर नगर (7,866) और शाहजहांपुर (7,707) क्रमशः दूसरे से पांचवें स्थान पर रहे। वहीं, जनपद स्तरीय राजस्व न्यायालयों में जौनपुर ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता साबित की। डीएम डॉ. दिनेश चंद्र सिंह के अनुसार, जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड द्वारा निर्धारित मासिक मानक (250) से लगभग दोगुना यानी 480 मामलों का निस्तारण (192%) किया।
>भू-राजस्व श्रेणी में भी जौनपुर ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया। यहां के अपर जिलाधिकारी (भू-राजस्व) ने 50 के मानक के मुकाबले 184 मामलों का निस्तारण किया, जो 368% की उपलब्धि है। इस श्रेणी में गाजीपुर दूसरे और मिर्जापुर तीसरे स्थान पर रहे।
>
टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें