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अंबेडकरनगर के महामाया मेडिकल कॉलेज में नशा मुक्ति केंद्र शुरू, निशुल्क इलाज

स्मैक, हेरोइन, ब्राउन शुगर, अफीम और नंबर-4 की लत से जूझ रहे मरीजों को चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
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Bureau News Desk
25 Aug 2026
02:31 PM
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अंबेडकरनगर के महामाया मेडिकल कॉलेज में नशा मुक्ति केंद्र शुरू, निशुल्क इलाज
सोर्स - संवाददाता रवि दुबे
हाइलाइट्स
अंबेडकरनगर के महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज, सदरपुर में नशा मुक्ति केंद्र शुरू हुआ।
केंद्र का उद्घाटन मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश यादव ने किया।
स्मैक, हेरोइन, ब्राउन शुगर, अफीम और नंबर-4 की लत से जूझ रहे मरीजों को निशुल्क इलाज मिलेगा।
उपचार चिकित्सकीय देखरेख में उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की गई है।

अंबेडकरनगर जिले में नशे की लत से जूझ रहे मरीजों के उपचार के लिए महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज, सदरपुर में नशा मुक्ति केंद्र की शुरुआत की गई है। केंद्र का उद्घाटन मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश यादव ने किया। मेडिकल कॉलेज सदरपुर, टांडा रोड पर स्थित है।

नए शुरू किए गए नशा मुक्ति केंद्र में स्मैक, हेरोइन, ब्राउन शुगर, अफीम और नंबर-4 जैसे मादक पदार्थों के आदी मरीजों को निशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। केंद्र का उद्देश्य नशे की लत से जूझ रहे लोगों को चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराना और उपचार के जरिए उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटने में सहायता करना है।

नशा मुक्ति केंद्र में आने वाले मरीजों की समस्या और उनकी स्थिति के आधार पर उपचार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मरीजों को चिकित्सकीय देखरेख में आवश्यक उपचार दिया जाएगा।

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गंभीर नशे की लत वाले मरीजों के उपचार में चिकित्सकीय निगरानी का महत्व भी सामने आता है। नशा छोड़ने की प्रक्रिया के दौरान कुछ मरीजों में शारीरिक और मानसिक परेशानियां सामने आ सकती हैं। ऐसे में केंद्र में मरीजों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की गई है।

इस केंद्र में ऐसे लोग उपचार के लिए पहुंच सकेंगे जो लंबे समय से मादक पदार्थों के सेवन की समस्या से जूझ रहे हैं। निशुल्क उपचार की सुविधा शुरू होने से इलाज की लागत से जुड़ी बाधा कम होने की संभावना है, खासकर उन परिवारों के लिए जो निजी उपचार का खर्च वहन करने में कठिनाई महसूस करते हैं।

महामाया मेडिकल कॉलेज में शुरू किए गए नशा मुक्ति केंद्र में कई तरह के मादक पदार्थों की लत से जूझ रहे मरीजों के उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इनमें मुख्य रूप से स्मैक, हेरोइन, ब्राउन शुगर, अफीम, नंबर-4 शामिल हैं।

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केंद्र का दायरा इन मादक पदार्थों के आदी मरीजों को चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। मरीज की समस्या को समझने के बाद उपचार प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

नशा मुक्ति केंद्र का उद्घाटन मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश यादव ने किया। केंद्र की शुरुआत मेडिकल कॉलेज परिसर में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं के तहत की गई है।

उद्घाटन के अवसर पर मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. अमित गुप्ता, डॉ. सुधांशु चंदेल और डॉ. पारुल यादव समेत अन्य चिकित्सक मौजूद रहे। विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी में केंद्र की शुरुआत की गई।

मनोचिकित्सा विभाग की भागीदारी इस पहल का अहम हिस्सा है, क्योंकि नशे की लत से संबंधित कई मामलों में उपचार के दौरान मरीज की मानसिक स्थिति और व्यवहार से जुड़े पहलुओं पर भी चिकित्सकीय ध्यान देना पड़ सकता है।

नशे की लत का प्रभाव केवल मरीज तक सीमित नहीं रहता। इससे परिवार के सामने भी कई तरह की चुनौतियां सामने आती हैं। मरीज को इलाज के लिए तैयार करना, उपचार शुरू कराना और उपचार की प्रक्रिया को जारी रखना परिजनों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ऐसे में सरकारी मेडिकल कॉलेज में निशुल्क उपचार की सुविधा शुरू होने से उन परिवारों को भी उपचार की पहुंच मिल सकती है जिनके लिए इलाज का खर्च एक बड़ी समस्या है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्र का उद्देश्य नशे की लत से प्रभावित लोगों को चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना है।

नशा मुक्ति केंद्र शुरू होने के बाद मरीजों को जिले में ही उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे नशे से संबंधित उपचार के लिए स्थानीय स्वास्थ्य संस्थान की उपलब्धता बढ़ी है।

केंद्र के शुभारंभ के अवसर पर मनोचिकित्सा विभाग से जुड़े चिकित्सकों की मौजूदगी रही। डॉ. अमित गुप्ता, डॉ. सुधांशु चंदेल और डॉ. पारुल यादव समेत चिकित्सकों ने केंद्र की शुरुआत के दौरान उपस्थिति दर्ज कराई।

मरीजों के उपचार में उनकी स्थिति का आकलन कर आवश्यक चिकित्सकीय देखरेख उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। गंभीर नशे की आदत वाले मरीजों में नशा छोड़ने की प्रक्रिया के दौरान शारीरिक और मानसिक समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए उपचार के दौरान निगरानी की आवश्यकता बताई गई है।

महामाया मेडिकल कॉलेज में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की जाती रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2026 में कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग की ओर से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

नशा मुक्ति केंद्र की शुरुआत इसी व्यापक स्वास्थ्य सेवा ढांचे के बीच हुई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में केंद्र के लिए मरीजों की संख्या, भर्ती की अवधि, उपचार की विस्तृत पद्धति या संचालन के समय से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।

नशे की लत से जूझ रहे मरीजों के लंबे उपचार में परिवारों को आर्थिक चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में सरकारी मेडिकल कॉलेज में निशुल्क उपचार की व्यवस्था आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए उपयोगी हो सकती है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्र में मादक पदार्थों की लत से जूझ रहे मरीजों को चिकित्सकीय उपचार दिया जाएगा। इससे मरीजों और उनके परिवारों को जिले में ही उपचार की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

नशा मुक्ति केंद्र का उद्देश्य केवल नशे का सेवन बंद कराने तक सीमित न होकर मरीज को चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि उपचार की प्रक्रिया विशेषज्ञ निगरानी में पूरी की जा सके।

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