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मायावती का अखिलेश यादव पर हमला: ‘चवन्नी से रुपया’ बयान से गेस्ट हाउस कांड तक उठाए सवाल

बसपा अध्यक्ष ने अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान को अमर्यादित और अशोभनीय बताया, जाट समाज से माफी मांगने की मांग की और सपा के पुराने गठबंधन संबंधों पर भी सवाल उठाए।
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Bureau News Desk
22 Aug 2026
12:05 PM
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मायावती का अखिलेश यादव पर हमला: ‘चवन्नी से रुपया’ बयान से गेस्ट हाउस कांड तक उठाए सवाल
हाइलाइट्स
मायावती ने अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान पर आपत्ति जताई।
बसपा प्रमुख ने इस बयान को अमर्यादित, अशोभनीय और शर्मनाक बताया।
उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल, उसके नेता और चौधरी चरण सिंह के परिवार के अपमान के लिए जाट समाज से माफी की मांग की।
मायावती ने सपा पर सहयोगी दलों के साथ राजनीतिक स्वार्थ के अनुसार व्यवहार करने का आरोप लगाया।

बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर एक बार फिर निशाना साधा है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक बयान जारी कर अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस बयान को अमर्यादित, अशोभनीय और शर्मनाक बताया तथा अखिलेश यादव से राष्ट्रीय लोक दल, उसके नेता और दिवंगत चौधरी चरण सिंह के परिवार का अपमान करने के लिए जाट समाज से माफी मांगने की मांग की।

मायावती ने अपने बयान में समाजवादी पार्टी की सहयोगी दलों के साथ राजनीति, पुराने गठबंधनों और जातीय मुद्दों को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सपा का व्यवहार विरोधी दलों के साथ-साथ उसके सहयोगी दलों के प्रति भी राजनीतिक संकीर्णता और जातिवादी द्वेष से प्रभावित रहा है।

मायावती ने अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने इस टिप्पणी को अमर्यादित, अशोभनीय और शर्मनाक बताते हुए कहा कि अखिलेश यादव को राष्ट्रीय लोक दल, उसके नेता और दिवंगत चौधरी चरण सिंह के परिवार के संदर्भ में कही गई बात के लिए जाट समाज से माफी मांगनी चाहिए।

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मायावती की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी तैयारियों और रणनीतियों को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके बयान में सपा और बसपा के बीच पुराने राजनीतिक संबंधों तथा बाद में दोनों दलों के अलग होने की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया।

मायावती ने समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक स्वार्थ के अनुसार सहयोगी दलों का इस्तेमाल करती रही है और बाद में उनसे संबंध समाप्त कर लेती है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि सपा का ‘चाल, चरित्र और चेहरा’ विरोधी दलों के साथ-साथ सहयोगियों के लिए भी राजनीतिक संकीर्णता और जातिवादी द्वेष से प्रभावित रहा है।

यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश में सपा और उसके विभिन्न राजनीतिक सहयोगियों के बीच संबंधों को लेकर मायावती की ओर से उठाए गए सवालों का हिस्सा है। मायावती ने अपने आरोपों के समर्थन में पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख भी किया।

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बसपा अध्यक्ष ने अपने बयान में 1995 के स्टेट गेस्ट हाउस कांड की याद दिलाई। इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच बने गठबंधन की पृष्ठभूमि का उल्लेख किया।

मायावती के अनुसार, पुराने मतभेदों को दोबारा नहीं दोहराने का भरोसा मिलने के बाद अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव के दौरान बसपा के साथ गठबंधन किया था। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं आने के बाद यह गठबंधन भी टूट गया।

मायावती की इस टिप्पणी में सपा-बसपा के बीच बने राजनीतिक गठबंधन और उसके बाद हुए अलगाव को मौजूदा राजनीतिक विवाद के संदर्भ में रखा गया है। हालांकि, उनके बयान में दिए गए आरोप उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं।

मायावती ने समाजवादी पार्टी के पीडीए शब्द के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार पीडीए में ‘पी’ का अर्थ कभी पिछड़ा वर्ग और कभी पंडित बताते हैं।

उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी पिछड़े वर्गों के भीतर अपनी जाति के अलावा अन्य पिछड़ी जातियों, अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से ब्राह्मण समाज की हितैषी नहीं रही है।

मायावती की यह टिप्पणी जातीय प्रतिनिधित्व और राजनीतिक गठजोड़ से जुड़े सवालों के संदर्भ में है। उन्होंने अपने बयान में सपा की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति पर भी सवाल उठाए।

मायावती के शनिवार को जारी बयान में सबसे प्रमुख मुद्दों में से एक सपा की गठबंधन राजनीति रहा। उन्होंने पुराने राजनीतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए यह आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी अपने राजनीतिक हितों के अनुसार दूसरे दलों के साथ संबंध बनाती और समाप्त करती रही है।

बसपा प्रमुख ने सपा-बसपा गठबंधन के टूटने को भी इसी संदर्भ में रखा। उनके अनुसार, लोकसभा चुनाव के दौरान दोनों दलों के बीच गठबंधन हुआ था, लेकिन अपेक्षित चुनाव परिणाम नहीं आने के बाद यह गठबंधन समाप्त हो गया। इस बयान के जरिए मायावती ने मौजूदा राजनीतिक मतभेदों को दोनों दलों के पुराने संबंधों और गठबंधन के अनुभव से जोड़कर रखा है।

 

अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान पर मायावती ने विशेष रूप से जाट समाज की प्रतिक्रिया का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक दल, उसके नेता और चौधरी चरण सिंह के परिवार के अपमान के लिए अखिलेश यादव को जाट समाज से माफी मांगनी चाहिए।

मायावती ने इस मांग को अपने बयान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अखिलेश यादव की ओर से इस प्रतिक्रिया या माफी की मांग पर कोई जवाब शामिल नहीं है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज है। ऐसे समय में मायावती का यह बयान सपा और बसपा के बीच पुराने राजनीतिक मतभेदों को फिर से चर्चा में लाता है।

मायावती ने अपने बयान में जहां अखिलेश यादव की एक टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी, वहीं सपा की गठबंधन राजनीति, जातीय सामाजिक आधार और पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों को भी मुद्दा बनाया। उनके बयान में सपा-बसपा गठबंधन से लेकर पीडीए की राजनीति तक कई संदर्भ शामिल रहे।

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