आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फैसले में कोई नई बात नहीं है और जिन निर्देशों का उल्लेख किया गया है, उन्हें व्यवहारिक रूप से लागू करना बेहद कठिन है। उन्होंने इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इस दिशा में सबसे बेहतर काम अगर किसी सरकार ने किया है तो वह उत्तर प्रदेश सरकार है।
सुल्तानपुर लोकसभा सीट से पूर्व सांसद मेनका गांधी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सात नवंबर के जिस आदेश का उल्लेख किया है, उसका पालन करने के लिए भारी आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होगी। उनके अनुसार इस व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने में लगभग तीन लाख करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है, जबकि वर्तमान परिस्थितियों में सरकारों के पास इतना बजट उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि अदालत ने जिन आक्रामक या खतरनाक जानवरों को मारने के विकल्प की बात कही है, वह प्रावधान पहले से कानून में मौजूद है, लेकिन उसके लिए स्पष्ट प्रक्रिया और नियम तय हैं। ऐसे में इसे सीधे तौर पर लागू करना आसान नहीं होगा।
मेनका गांधी ने विभिन्न राज्यों में आवारा पशुओं और कुत्तों से निपटने के लिए किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अधिकांश राज्यों ने इस दिशा में अपेक्षित स्तर पर काम नहीं किया है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस विषय पर अपेक्षाकृत बेहतर पहल की है। उनके बयान को राज्य सरकार की नीतियों के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उन सभी याचिकाओं और आवेदनों को खारिज कर दिया, जिनमें आवारा कुत्तों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने और उनके बंध्याकरण संबंधी पूर्व निर्देशों को वापस लेने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार में नागरिकों का कुत्तों के हमलों से मुक्त होकर सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार भी शामिल है।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने आवारा पशुओं से संबंधित मामलों में ‘भारतीय पशु कल्याण बोर्ड’ द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रियाओं की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को भी खारिज कर दिया। साथ ही अदालत ने राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य वैधानिक निकायों को आवारा कुत्तों से निपटने के लिए बुनियादी ढांचा मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
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