>उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर सड़क पर उतर आई है। अखिलेश यादव और ब्रजेश पाठक के बीच डीएनए को लेकर शुरू हुआ बयानबाज़ी का विवाद अब पोस्टर वॉर का रूप ले चुका है। इस विवाद की आंच अब राजनीतिक मर्यादाओं को पार करती दिख रही है।
>मामला तब गरमाया जब भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश मंत्री जीशान खान ने भाजपा कार्यालय के सामने एक विवादित पोस्टर लगाया। पोस्टर में लिखा गया,
>“जो लोग मा. ब्रजेश पाठक जी का डीएनए पूछ रहे हैं, उन्होंने अपने पिता को पार्टी से निकाल दिया, घर से बेदखल कर दिया। ऐसे लोग अपने पिता जैसा व्यवहार नहीं कर सकते, क्योंकि उनके डीएनए में खोट है।”
>पोस्टर में यह भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने न केवल अपने पिता, बल्कि अपने चाचा को भी घर से बाहर कर दिया। पोस्टर में चुनौती दी गई कि,
“अगर हिम्मत है तो डीएनए टेस्ट करवा लें, सब सच सामने आ जाएगा।”
>इस उकसावे भरे पोस्टर पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता आगबबूला हो गए। आधी रात को सपा कार्यकर्ताओं ने पोस्टर पर कालिख पोती और उसे फाड़ दिया। मौके पर मौजूद सपा नेता अभिषेक श्रीवास्तव (राष्ट्रीय सचिव, लोहिया वाहिनी) ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा,
>“हमारे नेता का इस तरह अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर यह पोस्टर पॉलिटिक्स बंद नहीं हुई तो समाजवादी पार्टी भी करारा जवाब देगी।”
राजनीति में पोस्टर से प्रचार, अब बना संघर्ष का चेहरा
>उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल बनने से पहले ही इस तरह की घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि राजनीतिक दलों के बीच कड़वाहट चरम पर है। पोस्टर अब मतदाताओं को आकर्षित करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने का हथियार बनते जा रहे हैं।
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