AAP में नाराजगी की अटकलों के बीच राघव चड्ढा का बयान, बोले- “चुप रहता तो झूठ सच लगने लगता”

राज्यसभा सांसद ने स्क्रिप्टेड कैंपेन और कोऑर्डिनेटेड अटैक का लगाया आरोप, तीनों आरोपों को बताया गलत
Bureau 04 Apr 2026, 03:27 PM 1 min read
AAP में नाराजगी की अटकलों के बीच राघव चड्ढा का बयान, बोले- “चुप रहता तो झूठ सच लगने लगता”

 

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से नाराजगी की अटकलों के बीच सोशल मीडिया पर जारी बयान में अपने खिलाफ चल रहे आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ एक “स्क्रिप्टेड कैंपेन” चलाया जा रहा है और यह “कोऑर्डिनेटेड अटैक” का हिस्सा है।

 

 

राघव चड्ढा ने अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि वह शुरुआत में इस पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते थे, लेकिन बार-बार दोहराए जा रहे आरोपों के कारण जवाब देना जरूरी हो गया। उन्होंने कहा कि यदि चुप रहते तो झूठ भी सच लगने लगता।

 

उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए तीन प्रमुख आरोपों को क्रमवार खारिज किया। पहला आरोप संसद में विपक्ष के वॉकआउट के दौरान शामिल न होने को लेकर था। इस पर चड्ढा ने कहा कि यह “सफेद झूठ” है और उन्होंने चुनौती दी कि ऐसा एक भी दिन बताया जाए जब विपक्ष के वॉकआउट में उन्होंने हिस्सा न लिया हो। उन्होंने कहा कि संसद में लगे सीसीटीवी कैमरों के आधार पर इसकी जांच की जा सकती है।

 

दूसरे आरोप में कहा गया था कि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया। इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने के लिए न तो औपचारिक और न ही अनौपचारिक रूप से कहा गया।

 

चड्ढा ने यह भी कहा कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 10 सांसदों में से 6 या 7 सांसदों ने भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में केवल उन्हें ही जिम्मेदार क्यों ठहराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस तरह के प्रस्ताव के लिए 50 हस्ताक्षरों की आवश्यकता होती है और विपक्ष के पास पर्याप्त संख्या होने के बावजूद इसे मुद्दा बनाया जा रहा है।

 

तीसरे आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि वह संसद में मुद्दे नहीं उठाते या डर गए हैं। उन्होंने कहा कि वह संसद में शोर-शराबा करने के बजाय जनहित के मुद्दे उठाने के लिए गए हैं।

 

चड्ढा ने अपने संसदीय कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने जीएसटी, आयकर, पंजाब के जल संकट, दिल्ली की वायु गुणवत्ता, सरकारी स्कूलों की स्थिति, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं और भारतीय रेलवे से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाया है। इसके अलावा उन्होंने बेरोजगारी और महंगाई जैसे विषयों पर भी अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि संसद करदाताओं के पैसे से चलती है और उनका उद्देश्य वहां जनता से जुड़े मुद्दों को उठाना है 

 

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