ब्रिटेन के दस्तावेजों ने खोली पोल? राहुल गांधी की नागरिकता पर नई लड़ाई शुरू

ब्रिटिश नागरिकता विवाद में राहुल गांधी फंसे! लखनऊ हाईकोर्ट में पेश हुए नए सबूत, CBI कर रही जांच
News Desk 11 Jul 2025, 06:12 AM 1 min read
ब्रिटेन के दस्तावेजों ने खोली पोल? राहुल गांधी की नागरिकता पर नई लड़ाई शुरू


>राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। कर्नाटक निवासी याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा लखनऊ हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन (पुनर्विचार याचिका) दाखिल की गई है, जिसमें लंदन, वियतनाम और उज्बेकिस्तान से प्राप्त नई वीडियो फुटेज और दस्तावेज कोर्ट में प्रस्तुत किए गए हैं।

नागरिकता जांच पर केंद्र से जवाब


>14 मई 2025 को हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद गृह मंत्रालय के विदेशी नागरिकता अनुभाग ने ब्रिटिश सरकार को पत्र भेजकर राहुल गांधी की नागरिकता और पासपोर्ट संबंधी जानकारी मांगी थी। यूके सरकार ने पुष्टि की है कि जानकारी भारतीय दूतावास के माध्यम से भारत सरकार को भेजी जा चुकी है।

अब CBI कर रही जांच, कोर्ट ने कहा- राष्ट्रीय महत्व का मामला है


>पूरा मामला अब CBI की एंटी करप्शन ब्रांच-II (मुख्यालय, नई दिल्ली) को सौंप दिया गया है। कोर्ट ने सख्त लहजे में केंद्र से पूछा— राहुल गांधी भारतीय नागरिक हैं या नहीं? 10 दिन में स्पष्ट करें। अदालत ने यह भी कहा कि देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


>हैरानी की बात यह रही कि राहुल गांधी की ओर से कोई वकील कोर्ट में पेश नहीं हुआ, जबकि याचिकाकर्ता ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाए हैं कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन की एक कंपनी में डायरेक्टर रहते हुए खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था।

चुनाव आयोग, ED, आयकर विभाग भी बने पक्षकार


>याचिका में चुनाव आयोग, प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग, रायबरेली के रिटर्निंग ऑफिसर और लोकसभा अध्यक्ष को भी पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने कहा कि अगर दोहरी नागरिकता के आरोप सही साबित होते हैं, तो राहुल गांधी संविधान की शपथ का उल्लंघन कर चुके हैं और चुनाव लड़ने के अयोग्य हो जाते हैं।

नागरिकता रद्द करने की मांग


>भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 9(2) के तहत राहुल गांधी की नागरिकता रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि दोहरी नागरिकता रखने वाला व्यक्ति भारतीय संसद का सदस्य नहीं हो सकता।


>अब तक की कोर्ट कार्यवाही


  • >19 दिसंबर 2024: कोर्ट ने गृह मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी

  • >24 मार्च 2025: राज्य सरकार को 4 सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश

  • >21 अप्रैल 2025: केंद्र ने स्थिति रिपोर्ट सौंपी, कोर्ट ने कहा- “अपर्याप्त”, राष्ट्रीय महत्व का मामला है

  • >10 जून 2025: याचिकाकर्ता ने नई वीडियो और दस्तावेजों के साथ रिव्यू पिटीशन दाखिल की

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