चेक बाउंस मामले में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने अभिनेता के बदलते रुख पर नाराजगी जताते हुए सख्त टिप्पणी की और मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अभिनेता और उनके वकील की दलीलों में विरोधाभास पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि एक ओर अभिनेता भुगतान की बात कर रहे हैं, वहीं उनके वकील यह कह रहे हैं कि जेल जा चुके होने के कारण भुगतान नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि भुगतान करने की मंशा है, तो मामले की सुनवाई की आवश्यकता ही नहीं है और सीधे भुगतान किया जाना चाहिए।
30 दिन का समय देने से इनकार:
अभिनेता ने बकाया 6 करोड़ रुपये चुकाने के लिए 30 दिन का समय मांगा, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया। जस्टिस ने स्पष्ट रूप से कहा कि अब कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा और फैसला सुरक्षित रखा जा रहा है।
पहले भी हो चुकी है सजा:-
इस मामले में मई 2024 में एक सत्र अदालत ने राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी। बाद में हाईकोर्ट ने इस सजा पर रोक लगा दी थी, जब यह भरोसा दिया गया था कि विवाद आपसी सहमति से सुलझा लिया जाएगा। मामले को सुलझाने के लिए इसे हाईकोर्ट के मेडिएशन सेंटर भेजा गया था, लेकिन कई अवसर दिए जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया।
कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं:-
अदालत ने पहले अभिनेता को लगभग 2.5 करोड़ रुपये किस्तों में जमा करने की अनुमति दी थी, लेकिन यह राशि भी जमा नहीं कराई गई। इसके बाद फरवरी 2026 में कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया। 5 फरवरी 2026 को सरेंडर करने के बाद कुछ समय जेल में रहने के पश्चात उन्होंने 1.5 करोड़ रुपये जमा किए, जिसके बाद सजा पर अंतरिम रोक लगाई गई।
अब भी करोड़ों रुपये बकाया:-
शिकायतकर्ता कंपनी की ओर से पेश अधिवक्ता अवनीत सिंह सिक्का ने अदालत को बताया कि कुल भुगतान में अभी भी लगभग 7.75 करोड़ रुपये बकाया हैं। उन्होंने कहा कि केवल जेल की सजा काट लेने से आर्थिक दायित्व समाप्त नहीं होता और इसी आधार पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत मामला दायर किया गया था।
समझौते का विकल्प भी सुझाया गया:-
सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को समझौते का विकल्प सुझाया। शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि यदि 6 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है तो समझौते पर विचार किया जा सकता है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए राजपाल यादव ने अदालत को आश्वस्त किया कि वे हर आदेश का पालन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ है और उन्हें अपनी संपत्तियां बेचनी पड़ी हैं।
समझौते की कोई अंतिम सहमति नहीं बनने और समय विस्तार से इनकार के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में अदालत के अंतिम निर्णय का इंतजार है।
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