'सब बेईमान हैं, किस-किस का नाम गिनाऊं', राम मंदिर विवाद में महंत कमल नयन दास की टिप्पणी से बड़ी हलचल

अयोध्या में दानपात्र से कथित चढ़ावा गायब होने के मामले पर महंत कमल नयन दास, बृजभूषण शरण सिंह और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिक्रियाओं के बाद विवाद और चर्चा तेज हो गई है।

 

राम नगरी अयोध्या स्थित रामजन्मभूमि परिसर के मंदिरों में दानपात्र से चढ़ावे की राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में संतों और राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने के बाद चर्चा और तेज हो गई है। कई लोगों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास, कैसरगंज से भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दानपात्र से कथित रूप से चढ़ावा गायब होने के मामले को गंभीर बताते हुए अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।

 

रामजन्मभूमि परिसर के दानपात्रों से बड़ी रकम के कथित गबन के आरोपों के बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। मामले में अब तक किसी प्रकार की एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने को लेकर भी चर्चा हो रही है। जब इस संबंध में ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, तो निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्र ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, ट्रस्ट के सदस्य गोपाल राव ने कथित गबन की घटना से इनकार करते हुए कहा कि ऐसा कोई मामला हुआ ही नहीं है।

 

मामले से जुड़ी जानकारियां सामने आने के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि गणना कक्ष के आसपास तैनात सुरक्षा कर्मियों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी रही। परिसर में निजी सुरक्षा एजेंसियों के साथ पुलिस और सीआईएसएफ के जवान भी तैनात रहते हैं। ऐसे में यह चर्चा हो रही है कि यदि जांच और निगरानी की प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावी होती तो कथित रूप से इतनी बड़ी राशि परिसर से बाहर कैसे निकल सकती थी।

 

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "सब के सब बेईमान हैं, हम किस-किस का नाम गिनाएं। सबकी जांच भगवान करेंगे और उन्हें दंड देंगे।" उन्होंने कहा कि यदि जांच करने वाले ही बेईमान हों तो निष्पक्ष जांच कैसे होगी। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग पहले साधारण जीवन जीते थे, वे अब बड़ी-बड़ी गाड़ियों में चलते हैं और उनके बड़े मकान बन गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि राम जन्मभूमि से जुड़े किसी भी मामले में यदि संदेह उत्पन्न होता है तो उसकी जांच आवश्यक है और ऐसी जांच होनी चाहिए जिस पर सभी पक्षों को भरोसा हो।

 

भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में बहुत बड़े लोग शामिल हैं और यदि वह अभी पूरी सच्चाई बता देंगे तो स्वयं परेशानी में पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह इस विषय पर अधिक नहीं बोलना चाहते, लेकिन समय आने पर पूरे मामले की जानकारी सामने रखेंगे।

 

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दान से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण से जुड़े विभिन्न चरणों के दौरान भी आरोप सामने आते रहे हैं। उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके रहते ऐसी घटनाएं होने के आरोप लगना कोई नई बात नहीं है।

 

जहां एक ओर कई संत और राजनीतिक हस्तियां इस मुद्दे पर सवाल उठा रही हैं, वहीं दूसरी ओर ट्रस्ट के सदस्य गोपाल राव ने पूरे मामले को खारिज करते हुए कहा कि दानपात्र से चढ़ावा गायब होने जैसी कोई घटना नहीं हुई है। उनके बयान के बाद मामले को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।


 

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