>लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमाई हुई है। समाजवादी पार्टी से निष्कासित और विधानसभा द्वारा निर्दलीय घोषित किए गए तीन विधायक — राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और मनोज पांडेय इन दिनों सियासी चर्चाओं के केंद्र में हैं। अटकलें हैं कि या तो उन्हें कोई नई जिम्मेदारी दी जा सकती है या फिर वे अपनी मौजूदा विधायकी से इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ सकते हैं।
>समाजवादी पार्टी ने इन अटकलों के बीच इन नेताओं को सीधी चुनावी चुनौती दी है। सपा प्रवक्ता दीपक रंजन ने कहा है कि अगर इन विधायकों को लगता है कि वे अपने बलबूते जीते थे, तो उन्हें तुरंत विधायकी से इस्तीफा देकर दोबारा मैदान में उतरना चाहिए।
>"जनता बताएगी कि असली समर्थन किसका है"
>दीपक रंजन ने साफ तौर पर कहा कि इन नेताओं ने न सिर्फ पार्टी को बल्कि जनता को भी धोखा दिया है। “अगर इनमें नैतिकता बाकी है, तो ये इस्तीफा देकर चुनाव का सामना करें। तभी पता चलेगा कि जनता किसके साथ खड़ी है।”
>उन्होंने घोसी उपचुनाव का हवाला देते हुए कहा, “जिस तरह से दारा सिंह चौहान को जनता ने नकार कर सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह को जिताया, उसी तरह जनता इन बागियों को भी सबक सिखाएगी।”
>बीजेपी को भी घोसी की हार का डर?
>सपा प्रवक्ता ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा को घोसी उपचुनाव की हार आज भी डराती है। इसलिए वह सपा के बागी विधायकों के सहारे नई चाल चलना चाहती है। लेकिन जनता सब देख रही है और सही समय पर जवाब देगी।
>क्या करेंगे तीनों विधायक?
>सपा से निष्कासन के बाद इन तीनों विधायकों ने कहा था कि वे अपने समर्थकों से सलाह लेकर भविष्य की रणनीति तय करेंगे। अब देखना यह है कि वे पार्टी की चुनौती को स्वीकार करते हैं या फिर सियासी रणनीति के तहत कोई दूसरा रास्ता अख्तियार करते हैं।
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