>उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। ‘सूक्ष्म उद्यम सखी’ योजना के तहत राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने स्वयं सहायता समूह (SHG) की 13,064 महिलाओं को उद्यमिता का प्रशिक्षण देने का फैसला लिया है। ये महिलाएं न केवल खुद उद्यम शुरू करेंगी, बल्कि 50-50 अन्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें भी आत्मनिर्भर बनाएंगी।
>इस योजना की परीक्षा 17 जून को राज्य के 39 जनपदों में सफलतापूर्वक आयोजित हुई, जिसमें 10,000 से अधिक SHG महिलाओं ने भाग लिया। यह पहल न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाली है, बल्कि प्रधानमंत्री के “लखपति दीदी” विज़न को भी साकार करने का सशक्त माध्यम है।
क्या है ‘सूक्ष्म उद्यम सखी’ योजना?
>उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत शुरू की गई इस योजना में समूह की महिलाओं को स्वरोजगार और छोटे उद्यमों की स्थापना हेतु प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके तहत:
- 13,064 महिलाएं ‘सूक्ष्म उद्यम सखी’ बनेंगी।
- प्रत्येक उद्यम सखी लगभग 50 अन्य महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ेगी।
- कुल 6.5 लाख से अधिक सूक्ष्म उद्यम स्थापित किए जाने की योजना है।
- डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स संस्था इस पूरी प्रक्रिया में तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण सहयोग दे रही है।
प्रशिक्षण और सहयोग
>इन महिलाओं को व्यवसाय की बारीकियों, ऋण सुविधा, बाजार की जानकारी और उत्पाद विपणन जैसे अहम क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाएगा। बैंक सखी की मदद से उन्हें लोन और वित्तीय सहायता भी दिलाई जाएगी।
>मिशन निदेशक श्रीमती दीपा रंजन ने बताया कि यह योजना ग्रामीण महिलाओं को ‘सहभागी से संचालक’ की भूमिका में लाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। वे अब दूसरों को भी प्रशिक्षण और रोज़गार उपलब्ध कराने की स्थिति में होंगी।
>विस्तृत परीक्षा और उत्साहजनक भागीदारी
परीक्षा के आयोजन को लेकर महिलाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। सुबह 5 बजे से ही पूरे प्रदेश से कॉल्स और संदेशों का सिलसिला शुरू हो गया था, जिसने प्रशासन और टीम को नई ऊर्जा दी। मिशन निदेशक ने इसे “भविष्य की नीतियों के लिए आदर्श उदाहरण” बताया।
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