उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की नई रणनीति पर काम शुरू किया है। पार्टी का फोकस माइक्रोमैनेजमेंट पर है और इसके तहत प्रत्येक बूथ पर 50 से 60 वालंटियर तैयार करने की योजना है। इन वालंटियर को पार्टी के अलग-अलग मोर्चों के माध्यम से बूथ स्तर पर जोड़ा जाएगा।
भाजपा के पांच प्रमुख मोर्चे—युवा, किसान, ओबीसी, महिला और एससी-एसटी—हर बूथ पर 10-10 वालंटियर नियुक्त करेंगे। पार्टी की प्रदेश इकाई ने इन मोर्चों से कहा है कि संबंधित बूथ और क्षेत्र में जिन जातियों की संख्या या प्रभाव अधिक है, उसी के अनुरूप वालंटियर तैयार किए जाएं। इस व्यवस्था के तहत बूथ स्तर पर पार्टी की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर की जानकारी जुटाने पर भी जोर दिया गया है। चुनाव से पहले ये वालंटियर अपने-अपने क्षेत्रों की सर्वे रिपोर्ट पार्टी को उपलब्ध कराएंगे।
भाजपा के संगठनात्मक ढांचे के अनुसार उत्तर प्रदेश में 98 संगठनात्मक जिले और 1,918 मंडल हैं। पार्टी के स्तर पर प्रदेश में करीब 1.77 लाख बूथ माने जाते हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए इन्हीं बूथों को संगठनात्मक गतिविधियों का महत्वपूर्ण आधार बनाया जा रहा है। पार्टी ने हाल में सभी बूथों पर एक साथ बैठकें भी की थीं। इसके बाद बूथ समितियों का दो स्तरों पर सत्यापन किया गया। इस प्रक्रिया के जरिए बूथ स्तर पर संगठन की स्थिति और समितियों की संरचना की समीक्षा की गई। भाजपा की मौजूदा बूथ संरचना में सामान्य तौर पर बूथ अध्यक्ष के साथ 11 से 20 सदस्यों की टीम होती है। इस बार पार्टी ने बूथ अध्यक्षों से उनके क्षेत्र का जातीय गणित भी मांगा है। इसके आधार पर स्थानीय सामाजिक संरचना से संबंधित जानकारी को संगठनात्मक स्तर पर इस्तेमाल करने की तैयारी है।
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नई रणनीति के तहत भाजपा के पांच मोर्चों को बूथ स्तर पर अलग-अलग जिम्मेदारी दी जा रही है। युवा, किसान, ओबीसी, महिला और एससी-एसटी मोर्चे प्रत्येक बूथ पर 10-10 वालंटियर तैयार करेंगे। इस हिसाब से पांचों मोर्चों से 50 वालंटियर का आधार तैयार होगा। इसके अलावा बूथ स्तर पर संगठन की मौजूदा टीम और अन्य कार्यकर्ताओं को मिलाकर प्रत्येक बूथ पर वालंटियर की संख्या 50 से 60 तक पहुंचने की योजना है। पार्टी की प्रदेश इकाई ने मोर्चों को निर्देश दिया है कि वालंटियर का चयन क्षेत्र में प्रभाव रखने वाली जातियों और स्थानीय सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखकर किया जाए। इसका उद्देश्य प्रत्येक वर्ग के बीच संगठन की पहुंच को बूथ स्तर तक ले जाना है।
भाजपा की नई बूथ रणनीति में स्थानीय जातीय गणित को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। पार्टी ने बूथ अध्यक्षों से अपने-अपने बूथ की जातीय संरचना से जुड़ी जानकारी मांगी है। इसके अलावा मोर्चों के वालंटियर भी स्थानीय स्तर पर अपने वर्ग के बीच काम करेंगे। पार्टी की योजना के मुताबिक ये वालंटियर संगठन की नीतियों और कार्यक्रमों की जानकारी अपने संबंधित वर्ग तक पहुंचाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया में बूथ स्तर से मिलने वाली जानकारी को विधानसभा क्षेत्र की चुनावी तैयारी में इस्तेमाल करने की योजना है। चुनाव से पहले वालंटियर द्वारा तैयार की जाने वाली सर्वे रिपोर्ट भी पार्टी को उपलब्ध कराई जाएगी।
बूथ स्तर से जुटाई जाने वाली रिपोर्ट का इस्तेमाल केवल संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पार्टी इन बूथ रिपोर्ट का अध्ययन करेगी और विधानसभा क्षेत्र के स्तर पर मिले फीडबैक को भी देखेगी। पार्टी नए उम्मीदवारों को अवसर देने के लिए इन रिपोर्ट का अध्ययन कर सकती है। हालांकि, स्रोत में किसी विशेष विधानसभा सीट या संभावित उम्मीदवार के नाम का उल्लेख नहीं है। इस व्यवस्था में बूथ स्तर पर मिलने वाली स्थानीय जानकारी को ऊपर के संगठनात्मक स्तर तक पहुंचाने की प्रक्रिया तैयार की जा रही है। इससे पार्टी को अलग-अलग क्षेत्रों में संगठन की स्थिति और स्थानीय सामाजिक समीकरण की जानकारी मिलने की उम्मीद संगठनात्मक योजना के स्तर पर रखी गई है।
नई रणनीति में ओबीसी और अनुसूचित मोर्चे पर विशेष फोकस रखने की बात कही गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पार्टी इन दोनों मोर्चों को इसलिए महत्वपूर्ण मान रही है क्योंकि संबंधित वर्गों के वोटों की संख्या अधिक है। इसके साथ ही सवर्ण मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए प्रबुद्ध सम्मेलन आयोजित किए जाने की योजना है। इन सम्मेलनों में संबंधित वर्ग के लोगों तक संगठन और पार्टी की नीतियों की पहुंच बढ़ाने पर काम किया जाएगा। इस तरह बूथ स्तर की नई रणनीति में अलग-अलग सामाजिक वर्गों के लिए अलग-अलग संगठनात्मक माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। युवा और किसान जैसे वर्गों के लिए भी संबंधित मोर्चों के जरिए वालंटियर तैयार किए जाएंगे, जबकि महिला मोर्चा बूथ स्तर पर 10-10 कार्यकर्ताओं को तैनात करेगा।
भाजपा की योजना में महिला मोर्चे की भी अलग भूमिका तय की गई है। पार्टी के अनुसार महिला मोर्चा प्रत्येक बूथ पर 10-10 कार्यकर्ताओं को तैनात करेगा। इन कार्यकर्ताओं के जरिए महिला मतदाताओं और स्थानीय स्तर पर महिला वर्ग तक संगठन की पहुंच बनाने की तैयारी है। अन्य मोर्चों की तरह महिला मोर्चे के कार्यकर्ता भी बूथ स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों में भाग लेंगे। बाद में मोर्चों की ओर से सम्मेलन भी कराए जाएंगे। इन सम्मेलनों की निगरानी के लिए विशेष समिति की व्यवस्था की जाएगी। इनमें प्रदेश और केंद्रीय टीम के वरिष्ठ पदाधिकारियों के शामिल होने की योजना है।
भाजपा ने चुनावी तैयारी के क्रम में पहले ही बूथ समितियों की समीक्षा शुरू कर दी है। हाल में सभी बूथों पर बैठकें आयोजित की गईं और इसके बाद बूथ समितियों का दो स्तरों पर सत्यापन किया गया। पार्टी की संरचना के अनुसार बूथ अध्यक्ष समेत 11 से 20 सदस्यों की टीम बूथ समिति का आधार होती है। अब इस संगठनात्मक टीम के साथ पांच मोर्चों के अतिरिक्त वालंटियर जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इससे बूथ स्तर पर संगठन की मौजूदा टीम के समानांतर अलग-अलग सामाजिक और वर्गीय समूहों से जुड़े कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने की योजना है।
उत्तर प्रदेश में पार्टी की बूथ रणनीति को लेकर राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी भी संगठन के साथ बैठकें कर चुके हैं। पिछले दिनों लखनऊ पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष ने भी बूथ मैनेजमेंट पर संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा की थी। इसके बाद बूथ स्तर पर संगठन को अधिक सक्रिय करने और स्थानीय स्तर की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
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