>उत्तर प्रदेश में 50 करोड़ रुपये से अधिक का सालाना कारोबार करने वाले व्यापारियों की वित्तीय जांच को लेकर राज्य कर विभाग ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। वित्तीय वर्ष 2022-23 के कारोबार के ऑडिट के लिए विभाग ने 3,000 ऑडिट टीमें गठित की हैं, जो बड़े व्यापारियों के लेन-देन की गहन जांच करेंगी। ऑडिट का उद्देश्य कर भुगतान में पारदर्शिता बढ़ाना और टैक्स अनुपालन को मजबूत करना है।
>राज्य कर आयुक्त नितिन बंसल द्वारा जारी आदेश के अनुसार विभाग के 20 जोनों को तीन सेक्टर ए, बी और सी में विभाजित किया गया है। सेक्टर ए और बी में आठ-आठ जोन शामिल हैं, जबकि सेक्टर सी में चार जोन रखे गए हैं। हर जोन में 150-150 ऑडिट टीमें तैनात की जाएंगी, जो निर्धारित मानकों के आधार पर व्यापारियों के वित्तीय दस्तावेजों का परीक्षण करेंगी।
>प्रारंभिक चरण में उन व्यापारियों की जांच की जाएगी जिनका वार्षिक कारोबार 50 करोड़ रुपये से अधिक है। इस श्रेणी के व्यापारियों की जांच पूरी होने के बाद विभाग 50 करोड़ रुपये से कम कारोबार करने वाले अन्य करदाताओं का ऑडिट भी शुरू करेगा। विभाग ने ऑडिट पूरा करने की अंतिम समय-सीमा 30 जून 2026 तय की है। जांच के दौरान अनियमितता मिलने पर संबंधित व्यापारी को नोटिस जारी किया जाएगा और आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
>विभाग के अनुसार यह अभियान राज्य में कर प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए शुरू किया गया है। बड़े व्यापारियों की जांच से कर अनुपालन की स्थिति स्पष्ट होगी और राजस्व वृद्धि में भी मदद मिलेगी।
>इसी बीच, राज्य सरकार विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के विजन के अनुरूप पर्यटन विकास के लिए गुरुवार को योजना भवन में कार्यशाला आयोजित करेगी। इस कार्यशाला में हेरिटेज, ईको और वाइल्डलाइफ पर्यटन को बढ़ावा देने पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह और मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी कार्यशाला का उद्घाटन करेंगे, जबकि काशी विश्वनाथ धाम के सीईओ विश्व भूषण तीर्थ पर्यटन सर्किटों की बढ़ती मांग पर प्रस्तुति देंगे।
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