उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ते में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। सरकार के इस फैसले के बाद महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया है। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार की ओर से गुरुवार को इस संबंध में शासनादेश जारी किया गया।
राज्य सरकार का यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक परिस्थितियों के चलते पेट्रोल-डीजल, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। शासनादेश के अनुसार बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा।
जारी आदेश में कहा गया है कि 1 जनवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक की बकाया राशि सीधे संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के सामान्य भविष्य निधि खाते में जमा कराई जाएगी। हालांकि इस राशि को जमा करने से पहले उस पर लागू आयकर और अधिभार की कटौती की जाएगी। शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह प्रक्रिया वित्त विभाग के 21 मार्च 2023 के पूर्व आदेशों के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पूरी की जाएगी।
सरकार ने बकाया राशि के निकासी संबंधी प्रावधान भी स्पष्ट किए हैं। शासनादेश के मुताबिक सामान्य भविष्य निधि खाते में जमा की गई यह राशि 1 मई 2027 तक खाते में सुरक्षित रहेगी और कर्मचारी निर्धारित अवधि से पहले इसे नहीं निकाल सकेंगे। हालांकि जिन मामलों में भविष्य निधि नियमों के तहत अंतिम आहरण की अनुमति होगी, वहां यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
वहीं जिन कर्मचारियों या अधिकारियों के पास सामान्य भविष्य निधि खाता नहीं है, उनके लिए सरकार ने अलग व्यवस्था निर्धारित की है। ऐसे कर्मचारियों की बकाया राशि सार्वजनिक भविष्य निधि खाते में जमा कराई जाएगी या राष्ट्रीय बचत पत्र के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। यदि किसी राशि के बराबर राष्ट्रीय बचत पत्र उपलब्ध नहीं हो सकेगा तो शेष राशि का भुगतान नकद रूप में किया जाएगा।
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली से जुड़े कर्मचारियों के लिए भी शासनादेश में विशेष प्रावधान किए गए हैं। आदेश के अनुसार 1 जनवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक के महंगाई भत्ते के बकाये में से 10 प्रतिशत राशि कर्मचारियों के टियर-1 पेंशन खाते में जमा की जाएगी। इसके साथ ही राज्य सरकार अथवा नियोक्ता द्वारा उस अवशेष राशि का 14 प्रतिशत अंशदान भी संबंधित टियर-1 खाते में जमा कराया जाएगा।
राज्य सरकार के इस फैसले को कर्मचारियों के लिए आर्थिक राहत के रूप में देखा जा रहा है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब महंगाई का असर घरेलू बजट पर लगातार बढ़ रहा है। शासनादेश जारी होने के बाद विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के बीच इस निर्णय को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
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