उत्तर प्रदेश में नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। पूर्वांचल समेत राज्य के कई जिलों में गंगा, सरयू, घाघरा और शारदा नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। दूसरी ओर वाराणसी और प्रयागराज में नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे नीचे आने से कुछ राहत के संकेत मिले हैं। इसके बावजूद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन सामान्य नहीं हो पाया है।
कई जिलों में गांवों तक बाढ़ का पानी पहुंचने से संपर्क मार्ग बंद या जलमग्न हो गए हैं। सीतापुर में बैराजों से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद रेउसा, रामपुर मथुरा और बेहटा क्षेत्र के 274 गांवों में संकट बना हुआ है। बहराइच में घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि बाराबंकी, गोंडा, फर्रुखाबाद, लखीमपुर, जालौन और अन्य जिलों में भी बाढ़ का असर दर्ज किया गया है। बारिश, जलभराव और बाढ़ से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में जनहानि की जानकारी भी सामने आई है। कई स्थानों पर दीवार और कच्चे मकान गिरने, नाले या नदी में डूबने की घटनाएं हुई हैं।
प्रदेश में बाढ़ की स्थिति एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर नदियों का जलस्तर घट रहा है, जबकि दूसरे इलाकों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। बलिया में गंगा का जलस्तर 59.62 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 57.615 मीटर से 2.05 मीटर ऊपर है। हालांकि यहां गंगा के जलस्तर में कमी जारी है। मऊ के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और नेपाल के बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण सरयू का जलस्तर बढ़ रहा है। सरयू यहां खतरे के निशान 64.010 मीटर से करीब 55 सेंटीमीटर ऊपर है। पिछले 24 घंटे में इसके जलस्तर में 10 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई।
यह खबर भी पढ़े - सुल्तानपुर में स्कूल बस की टक्कर, बाइक सवार माता-पिता और बेटे की मौत
गाजीपुर में गंगा का पानी घट रहा है। सोमवार शाम यहां जलस्तर खतरे के निशान से 13.5 सेंटीमीटर नीचे दर्ज किया गया। वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 70 सेंटीमीटर नीचे आ गया है। प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों नदियों का जलस्तर घटने की जानकारी है। इससे इन शहरों में बाढ़ की स्थिति में कुछ सुधार के संकेत मिले हैं।
फर्रुखाबाद में गंगा की बाढ़ का असर बड़े क्षेत्र में है। जिले के 102 गांवों की करीब 80 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित बताई गई है। सोमवार सुबह गंगा का जलस्तर 69.62 मीटर दर्ज किया गया था, जो शाम छह बजे घटकर 69.56 मीटर हो गया। पानी कम होने के बाद घाटों की सीढ़ियां दिखाई देने लगी हैं। हालांकि मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह व्यवस्था अभी भी प्रभावित है। गंगा आरती घाटों की छतों से की जा रही है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए नौका संचालन पर रोक जारी है। फर्रुखाबाद के प्रभावित क्षेत्रों में पानी पहुंचने से स्थानीय आवागमन और सामान्य गतिविधियों पर असर पड़ा है। बाढ़ के कारण ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यह खबर भी पढ़े - लखनऊ में चलती कार पर गिरा विशाल नीम का पेड़
सीतापुर में बैराजों से करीब 4.95 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद कई क्षेत्रों में बाढ़ का दबाव बना हुआ है। रेउसा, रामपुर मथुरा और बेहटा क्षेत्र के 274 गांव प्रभावित स्थिति में हैं। बाढ़ के पानी और जलभराव के कारण इन क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी पहुंचने से सामान्य आवागमन बाधित हुआ है। सीतापुर में दीवार गिरने से एक महिला की मौत की भी जानकारी सामने आई है। बारिश और जलभराव के बीच जिले में बाढ़ की स्थिति पर असर लगातार बना हुआ है। बहराइच में घाघरा नदी खतरे के निशान से 42 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जिले के 15 गांव बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं।
लखीमपुर खीरी के पलिया में भी शारदा नदी खतरे के निशान से 28 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बनबसा से 1.20 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद क्षेत्र के कई संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं। शारदा नदी के बढ़े जलस्तर का असर सीमावर्ती और निचले इलाकों में भी देखा जा रहा है। पानी बढ़ने के कारण ग्रामीण मार्गों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। बाराबंकी में करीब 60 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। गोंडा में 20 गांवों के करीब 200 घरों में पानी घुसने की जानकारी है। बाढ़ के पानी के घरों तक पहुंचने से लोगों की दैनिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क मार्गों पर पानी आने से आवागमन में परेशानी हो रही है। पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में नदियों के जलस्तर में बदलाव के कारण बाढ़ का प्रभाव अलग-अलग स्तर पर बना हुआ है।
आजमगढ़ में बाढ़ के दबाव के कारण बेलहिया संपर्क मार्ग टूट गया। संपर्क मार्ग टूटने से स्थानीय स्तर पर आवागमन प्रभावित हुआ है। जालौन में करीब 60 गांवों पर बाढ़ का खतरा बना हुआ है। जिले के प्रभावित क्षेत्रों में नदी और जलभराव की स्थिति पर नजर बनी हुई है। इन जिलों के अलावा राज्य के अन्य हिस्सों में भी लगातार बारिश और नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण बाढ़ का असर दर्ज किया गया है।
अयोध्या में सरयू नदी खतरे के निशान से 31 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। नदी का बढ़ा जलस्तर आसपास के इलाकों में बाढ़ की स्थिति को प्रभावित कर रहा है। अयोध्या में पीडब्ल्यूडी कार्यालय की बाउंड्रीवाल गिरने से मोटरसाइकिल मिस्त्री रविंदर गौड़ की मौत की जानकारी दी गई है। वहीं, बांदा में नाले में डूबने से एक युवक की मौत हुई। महोबा में दीवार गिरने से घायल वृद्ध ने दम तोड़ दिया। बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। फर्रुखाबाद में 77 गांवों में पानी पहुंचने के बाद 75 परिषदीय विद्यालय बंद कर दिए गए हैं।
बरेली में बाढ़ और बारिश के कारण एक दर्जन से ज्यादा मकान गिरने की जानकारी है। जिले के डीएम ने आठवीं कक्षा तक के स्कूल बुधवार तक बंद रखने का आदेश दिया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क मार्गों के जलमग्न होने और टूटने से ग्रामीणों की आवाजाही पर भी असर पड़ा है। कई इलाकों में लोगों को सामान्य आवागमन के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। फर्रुखाबाद के समैचीपुर चितार में बाढ़ के कटान के कारण पांच मकान और तीन झोपड़ियां गिर गईं। बाढ़ के पानी के साथ कटान ने भी ग्रामीण क्षेत्रों में नुकसान बढ़ाया है। प्रभावित इलाकों में मकानों और संपर्क मार्गों पर पानी तथा कटान का असर दिखाई दे रहा है। नदी के किनारे बसे क्षेत्रों में जलस्तर और कटान दोनों स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।
सीतापुर में दीवार गिरने से एक महिला की मौत हुई। सुलतानपुर में रविवार आधी रात जर्जर खपरैल का कच्चा मकान ढह गया। मलबे में मां और बेटा दब गए, जिसमें महिला की जान चली गई। बारिश और जलभराव के बीच कच्चे और जर्जर ढांचों से जुड़ी घटनाएं भी सामने आई हैं। अलग-अलग जिलों में दीवार और मकान गिरने से लोगों के प्रभावित होने की जानकारी है।
बरेली मंडल के शाहजहांपुर में रेलवे ट्रैक की मरम्मत के दौरान दो वर्ष पहले खोदे गए गड्ढे में डूबने से किशोर विनय और करन की मौत हुई। बरेली में उफनाते नाले में डूबने से बालक भास्कर की मौत की जानकारी है। किसान राजवीर की रामगंगा में डूबने से जान चली गई। आंवला में अरिल नदी में बाइक सवार तीन युवकों के बह जाने की जानकारी सामने आई है। पीलीभीत में नेपाल सीमा से सटे नौहल्हा नकटाह क्षेत्र में नेपाली युवती सृष्टि मोबाइल फोन से रील बनाते समय फिसलकर शारदा नदी में बह गई। उसकी तलाश की जा रही है।
इटावा में शौचालय की जमीन धंसने के बाद करीब 60 फीट गहरा कुआं निकल आया। इस घटना को देखने के लिए मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। बारिश और जलभराव के दौरान जमीन धंसने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। इटावा की घटना में जमीन के नीचे मौजूद गहराई सामने आने के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
जहां प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है, वहीं वाराणसी और प्रयागराज में नदियों का जलस्तर घट रहा है। वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 70 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में भी कमी दर्ज की गई है। हालांकि प्रदेश के अन्य हिस्सों में गंगा, सरयू, घाघरा और शारदा के जलस्तर में बढ़ोतरी या खतरे के निशान से ऊपर बहने की स्थिति के कारण बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन बहाल नहीं हो सका है।
Explore Related Topics
टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें