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ग्राम प्रधान रहेंगे या बदल जाएगी व्यवस्था? यूपी की हजारों पंचायतों पर हाईकोर्ट में फैसला अभी बाकी

ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई टली, ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट न पेश होने पर अब 4 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
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Bureau News Desk
10 Jul 2026
05:41 PM
1 min read
ग्राम प्रधान रहेंगे या बदल जाएगी व्यवस्था? यूपी की हजारों पंचायतों पर हाईकोर्ट में फैसला अभी बाकी
सोर्स - लखनऊ संवाददाता (प्रदीप यादव)
हाइलाइट्स
इलाहाबाद हाईकोर्ट में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई।
ओबीसी आरक्षण से जुड़ी रिपोर्ट अदालत में पेश नहीं होने के कारण मामले की सुनवाई आगे बढ़ा दी गई।
हाईकोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त तय की है।
मामला प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक व्यवस्था और पंचायत संचालन से जुड़ा है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक व्यवस्था का भविष्य फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर टिका है। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण से संबंधित रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत नहीं होने के कारण मामले में अंतिम सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।

यह मामला केवल प्रशासकों की नियुक्ति तक सीमित नहीं माना जा रहा है। अदालत के अंतिम निर्णय का असर प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक व्यवस्था, पंचायत संचालन और आगे की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। इसी वजह से पंचायत प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों की नजर इस मामले पर बनी हुई है।

शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीबीएन माथुर ने अदालत के समक्ष सरकार का पक्ष रखते हुए ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के निर्णय का समर्थन किया। वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से इन नियुक्तियों की वैधानिकता पर सवाल उठाए गए।

हालांकि, ओबीसी आरक्षण से संबंधित रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। रिपोर्ट के अभाव में अदालत ने मामले की विस्तृत सुनवाई आगे बढ़ाते हुए अगली तारीख 4 अगस्त निर्धारित कर दी।

इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले भी पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव को तलब कर चुका है। इसके अलावा अपर मुख्य सचिव, पंचायती राज को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखने के निर्देश भी दिए गए थे। इससे स्पष्ट है कि अदालत इस मामले के विभिन्न कानूनी पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई कर रही है।

अब सभी की निगाहें 4 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर हैं। उम्मीद है कि उस दिन ओबीसी आरक्षण से संबंधित रिपोर्ट भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, जिसके बाद मामले के विभिन्न कानूनी पक्षों पर विस्तृत बहस हो सकती है। अदालत का निर्णय ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले की वैधानिकता पर स्पष्टता ला सकता है।

उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पंचायतों के प्रशासनिक कार्यों के संचालन के लिए राज्य सरकार ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया था। इसी निर्णय को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। याचिकाकर्ताओं ने नियुक्तियों की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं, जबकि राज्य सरकार अपने निर्णय का बचाव कर रही है।

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