उत्तर प्रदेश में खाद्य तथा रसद विभाग द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद को लेकर पिछले आठ वर्षों में बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक गेहूं, धान और मोटे अनाजों की खरीद के माध्यम से करोड़ों किसानों को सीधे लाभ पहुंचाया गया है। सरकार की ओर से किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर के जरिए रिकॉर्ड भुगतान किया गया।
प्रदेश में रबी विपणन वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक गेहूं खरीद अभियान के तहत कुल 51,70,117 किसानों से खरीद की गई। इस दौरान किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत ₹45,935.46 करोड़ का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया गया। किसानों की सुविधा के लिए प्रदेशभर में 5,837 गेहूं क्रय केंद्र संचालित किए गए, जिससे किसानों को स्थानीय स्तर पर उपज बेचने की सुविधा मिली।
वहीं, धान खरीद के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने बड़ा रिकॉर्ड दर्ज किया है। खाद्य तथा रसद विभाग के अनुसार, पिछले आठ से नौ वर्षों के दौरान 80,39,539 किसानों को धान खरीद योजना का लाभ मिला। इस अवधि में किसानों के खातों में ₹1,03,694.71 करोड़ की राशि डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर के माध्यम से ट्रांसफर की गई।
सरकार की खरीद नीति में मोटे अनाजों को भी शामिल किया गया। खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच ज्वार खरीद के माध्यम से 26,972 किसानों को ₹363.35 करोड़ का भुगतान किया गया। इसी अवधि में बाजरा खरीद के जरिए 1,48,718 किसानों को ₹1,854 करोड़ की राशि दी गई।
खाद्य तथा रसद विभाग के मुताबिक, खरीद प्रक्रिया को ऑनलाइन और डिजिटल माध्यम से संचालित किए जाने से पारदर्शिता बढ़ी है। भुगतान प्रक्रिया को डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर से जोड़े जाने के बाद किसानों को सीधे खातों में धनराशि मिलने लगी है। विभाग का कहना है कि क्रय केंद्रों के विस्तार और डिजिटल व्यवस्था के कारण खरीद प्रक्रिया को अधिक सरल और पारदर्शी बनाया गया है।
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