उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों को लेकर नई नीति को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस नीति पर अंतिम मुहर लगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई ट्रांसफर पॉलिसी मंगलवार यानी 5 मई से पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगी।
नई नीति के तहत तबादलों की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और नियंत्रित बनाने के लिए कई अहम प्रावधान जोड़े गए हैं। सरकारी आदेश के अनुसार अब विभागाध्यक्ष और संबंधित मंत्री संयुक्त रूप से कर्मचारियों के तबादलों पर निर्णय लेंगे। इसके साथ ही किसी भी विभाग में कुल स्वीकृत पदों की अधिकतम 10 प्रतिशत सीमा तक ही तबादले किए जा सकेंगे।
सरकार के अनुसार इस निति के जरिये अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती में संतुलन सुनिश्चित करने के साथ ही कार्यकुशलता में सुधार लाने पर जोर दिया गया है। यह स्थानांतरण नीति केवल वर्ष 2026-27 के लिए लागू रहेगी। आदेश के अनुसार तबादलों की अंतिम तिथि 31 मई 2026 निर्धारित की गई है। इसके अलावा समूह ‘क’ और ‘ख’ के उन अधिकारियों को स्थानांतरित किया जाएगा, जिन्होंने किसी एक जनपद में तीन वर्ष या किसी एक मंडल में सात वर्ष की सेवा पूरी कर ली है।
सरकारी निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विभागाध्यक्ष या मंडलीय कार्यालयों में की गई तैनाती की अवधि को स्थानांतरण की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। साथ ही मंडलीय कार्यालयों में अधिकतम तैनाती अवधि तीन वर्ष तय की गई है और लंबे समय से कार्यरत अधिकारियों के तबादले को प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया है।
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