उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड को बिजली टैरिफ बढ़ोतरी के मुद्दे पर बड़ा झटका लगा है। लखनऊ में इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन ने प्रस्तावित 10 प्रतिशत टैरिफ वृद्धि को अवैध करार देते हुए मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने यूपीपीसीएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एमडी को सात दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। मामला ऐसे समय सामने आया है जब राज्य के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति और बढ़ती मांग को लेकर चर्चा बनी हुई है। इसी बीच बिजली दरों में प्रस्तावित वृद्धि को लेकर उपभोक्ताओं के बीच भी चिंता जताई जा रही थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यूपीपीसीएल इसी महीने से 10 प्रतिशत बढ़ी हुई दरों के आधार पर वसूली की तैयारी कर रहा था। हालांकि, इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन ने इस प्रस्तावित वृद्धि पर आपत्ति जताते हुए इसे अवैध बताया है। आयोग का कहना है कि इस मामले में संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। इसी कारण अध्यक्ष और MD को निर्धारित अवधि के भीतर जवाब देने का निर्देश जारी किया गया है।
आयोग ने यूपीपीसीएल के शीर्ष अधिकारियों को सात दिन का समय दिया है। इस अवधि में उन्हें टैरिफ बढ़ोतरी के आधार और उससे जुड़े प्रशासनिक पहलुओं पर अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बिजली दरों से सीधे करोड़ों उपभोक्ता प्रभावित होते हैं।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अवधेश ने कहा कि एक ओर लोग बिजली संकट से परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर 10 प्रतिशत टैरिफ बढ़ोतरी का प्रयास किया गया। उन्होंने राज्य सरकार से पावर कॉर्पोरेशन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। अवधेश के अनुसार, ऐसे समय में जब उपभोक्ता पहले से कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, बिजली दरों में अतिरिक्त वृद्धि का मुद्दा गंभीर चिंता का विषय है।
अवधेश वर्मा, अध्यक्ष, राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद
यदि प्रस्तावित टैरिफ वृद्धि लागू होती, तो इसका सीधा प्रभाव बिजली उपभोक्ताओं के मासिक बिलों पर पड़ सकता था। हालांकि आयोग के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल इस प्रस्ताव को लेकर स्थिति स्पष्ट होने तक आगे की प्रक्रिया पर निगाहें बनी रहेंगी।
उत्तर प्रदेश में बिजली दरों और टैरिफ निर्धारण से जुड़े मामलों की निगरानी इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन द्वारा की जाती है। किसी भी टैरिफ संशोधन या शुल्क वृद्धि से जुड़े मामलों में नियामकीय प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक माना जाता है। वर्तमान मामले में आयोग द्वारा बढ़ोतरी को अवैध बताए जाने के बाद यह मुद्दा प्रशासनिक और नियामकीय दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
FAQs
1. आयोग ने किस बढ़ोतरी को अवैध बताया है?
प्रस्तावित 10 प्रतिशत बिजली टैरिफ बढ़ोतरी को।
2. किस संस्था ने यह निर्णय दिया?
इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन ने।
3. UPPCL को कितना समय दिया गया है?
आयोग ने सात दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है।
4. किन अधिकारियों से जवाब मांगा गया है?
UPPCL के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (MD) से।
5. यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि बिजली टैरिफ में बदलाव का सीधा असर लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
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