लखनऊ के लोहिया संस्थान में योग के जरिए जागरूकता का कार्यक्रम हुआ आयोजित

विश्व अस्थमा दिवस पर आरएमएलआईएमएस लखनऊ में योग जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, विशेषज्ञों ने बढ़ते प्रदूषण और अस्थमा के खतरे पर जताई चिंता।
Bureau 05 May 2026, 07:33 PM 1 min read
लखनऊ के लोहिया संस्थान में योग के जरिए जागरूकता का कार्यक्रम हुआ आयोजित

 

विश्व अस्थमा दिवस 2026 के अवसर पर डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में अस्थमा रोगियों के लिए योग आधारित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम संस्थान के फिजियोलॉजी विभाग और श्वसन रोग विभाग द्वारा संयुक्त रूप से योगशाला में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अस्थमा की रोकथाम, इनहेलर के महत्व, स्वच्छ वायु की आवश्यकता तथा योग और प्राणायाम के जरिए श्वसन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के प्रति जागरूकता फैलाना था। इस वर्ष विश्व अस्थमा दिवस की थीम अस्थमा से पीड़ित प्रत्येक व्यक्ति के लिए एंटी-इन्फ्लेमेटरी इनहेलर्स की उपलब्धता अभी भी एक अत्यावश्यक आवश्यकता” रखी गई है।

 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. अजय कुमार वर्मा, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, श्वसन रोग विभाग ने कहा कि भारत में अस्थमा रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वायु प्रदूषण इसके प्रमुख कारणों में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि अस्थमा अब केवल दवाओं और इनहेलर तक सीमित बीमारी नहीं रह गया है, बल्कि पर्यावरणीय स्थितियों से गहराई से जुड़ा हुआ स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है।

 

उन्होंने बताया कि देश के कई शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक है। लंग केयर फाउंडेशन के बहु-शहरी अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों में अस्थमा की व्यापकता चिंताजनक रूप से अधिक पाई गई है। अध्ययन के अनुसार लक्षणों के आधार पर अस्थमा की दर 21.7% रही, जबकि स्पाइरोमेट्री जांच में यह बढ़कर 29.4% तक पहुंच गई, यानी लगभग हर तीसरे बच्चे में फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित पाई गई।

 

डॉ. वर्मा ने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में अस्थमा रोगियों की समय पर पहचान नहीं हो पाती है। इसके पीछे जागरूकता की कमी, इनहेलर को लेकर सामाजिक भ्रांतियां और स्पाइरोमेट्री जांच सुविधाओं की सीमित उपलब्धता प्रमुख कारण हैं, जिससे इलाज में देरी होती है और रोग गंभीर रूप ले सकता है। उन्होंने बच्चों को सबसे अधिक संवेदनशील वर्ग बताते हुए कहा कि बचपन और गर्भावस्था के दौरान प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से फेफड़ों के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे भविष्य में श्वसन रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

 

कार्यक्रम में डॉ. रजनी बाला जसरोतिया और डॉ. मनीष वर्मा ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया और योग के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने नियमित योग अभ्यास को जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। व्यावहारिक सत्र के दौरान डॉ. पुलकित गुप्ता और डॉ. शिवम वर्मा ने अस्थमा रोगियों को श्वास संबंधी व्यायाम, योग तकनीकों और श्वसन देखभाल से जुड़ी जानकारी दी।

 

इस कार्यक्रम में मरीजों, स्वास्थ्यकर्मियों, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। आयोजन के दौरान यह संदेश दिया गया कि अस्थमा नियंत्रण में दवाओं और इनहेलर की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान स्वच्छ वायु, प्रदूषण नियंत्रण और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में निहित है।

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