>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हमेशा यह साबित किया है कि लोक कल्याण के आगे परंपरा कभी बाधा नहीं बन सकती। 19 सितंबर को ग्रेटर नोएडा में यूपी ट्रेड शो की तैयारियों का निरीक्षण करने वाले योगी आदित्यनाथ, मार्च 2017 से अब तक लगभग 20 बार नोएडा में विकास परियोजनाओं के शिलान्यास, लोकार्पण और समीक्षा बैठकों में शामिल हो चुके हैं।
>नोएडा, जिसे तीन दशकों तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने अभिशप्त शहर माना, वहां योगी की सक्रियता ने विकास की नई राह खोल दी। यह वही मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की सामाजिक समरसता की सीख को अपनाते हुए गोरक्षपीठ की नवरात्र परंपरा तक तोड़ी।
>करीब 11 साल पहले 30 सितंबर 2014 को ट्रेन हादसे में सैंकड़ों यात्रियों की मदद के लिए योगी जी ने पीठ की परंपरा को तोड़ मठ से बाहर निकलकर सीधे दुर्घटनास्थल की ओर रुख किया। इस साहसिक कदम से न केवल पीड़ितों को समय पर सहायता मिली, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई भी तेज हुई।
>योगी की यही प्रतिबद्धता उन्हें अयोध्या की ओर बार-बार ले गई, जहां उनके कार्यकाल में भव्य राम मंदिर निर्माण के साथ अयोध्या का कायाकल्प भी हो रहा है। मुख्यमंत्री का मानना है कि विकास और लोक कल्याण के लिए कभी भी परंपरा को बाधा नहीं बनने देना चाहिए। उनका यही दृष्टिकोण नोएडा, अयोध्या और पूरे प्रदेश में बदलाव की मिसाल बन गया है।
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