>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त चेतावनी के बाद बेसिक शिक्षा विभाग एक्शन मोड में आ गया है। अब प्रदेशभर के परिषदीय विद्यालय परिसरों में जर्जर भवनों की पहचान कर उन्हें ध्वस्त करने की प्रक्रिया तेज़ कर दी गई है। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि वे खतरा बने इन भवनों का तत्काल सत्यापन, मूल्यांकन और ध्वस्तीकरण करें। हाल ही में कुछ विद्यालय परिसरों में जर्जर भवनों की तस्वीरें सामने आई थीं, जिनसे न सिर्फ बच्चों की जान को खतरा था, बल्कि विभाग की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई। इसके बाद सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि "सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा।"
>बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि किसी जर्जर भवन से संबंधित कोई हादसा होता है, तो संबंधित अधिकारी को जिम्मेदार मानते हुए उस पर तत्काल विभागीय कार्यवाही की जाएगी। विभाग अब 'सुरक्षा, जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई' के मंत्र पर काम कर रहा है।
>हर जिले में जर्जर भवनों की सूची तैयार कर तकनीकी समिति को भेजी जा रही है, जो इनका निरीक्षण कर मूल्यांकन करेगी। पहले से चिह्नित ढांचों के पुनः सत्यापन और रिपोर्टिंग के निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। जिन भवनों को तकनीकी रूप से असुरक्षित घोषित किया जाएगा, वहां किसी भी प्रकार की शैक्षणिक गतिविधि नहीं चलेगी। बच्चों को अन्य सुरक्षित भवनों, पंचायत भवन या ग्राम सचिवालय में स्थानांतरित कर पढ़ाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। यदि किसी कारणवश किसी भवन को तुरंत ध्वस्त नहीं किया जा सकता, तो उसे 'निष्प्रयोज्य' घोषित कर सील किया जाएगा और दीवारों पर स्पष्ट चेतावनी लिखी जाएगी। बरसात के मौसम में छतों पर जमा पानी और कचरे से भवनों की स्थिति और बिगड़ जाती है। ऐसे में नगर पंचायत और ग्राम पंचायत के माध्यम से नियमित सफाई और जल निकासी की व्यवस्था अनिवार्य की गई है।
>विशेषज्ञ श्यामकिशोर तिवारी ने कहा कि जर्जर भवनों को लेकर पहले भी कई बार दिशा-निर्देश जारी हुए थे, लेकिन अब इस पर कठोर, समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई अपरिहार्य हो चुकी है। यह कदम न सिर्फ विद्यालय परिसरों की सुरक्षा को पुख्ता करेगा, बल्कि परिषदीय शिक्षा व्यवस्था में आमजन का भरोसा भी मजबूत करेगा।
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