>"स्कूल जाना चाहती हूं, आप मेरा एडमिशन करा दीजिए..." — सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'जनता दर्शन' में जब मुरादाबाद से आई नन्हीं वाची ने यह बात कही, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति मुस्कुरा उठा। यह क्षण सिर्फ एक संवाद नहीं था, बल्कि योगी सरकार की संवेदनशील और मानवीय प्रशासन शैली का जीवंत उदाहरण बन गया।
>हर दिन हजारों फरियादी 'जनता दर्शन' में आते हैं, लेकिन वाची का मासूम अंदाज़ और मुख्यमंत्री का भावनात्मक जुड़ाव एक यादगार पल बन गया। जब सीएम योगी वाची के पास पहुंचे, तो पहले उसका हालचाल जाना, फिर प्रार्थना पत्र पढ़ा। पूछने पर बच्ची ने तपाक से कहा, "मैं स्कूल जाना चाहती हूं, आप मेरा एडमिशन करा दीजिए..."।
>मुख्यमंत्री ने तुरंत प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद को निर्देशित किया — "इस बच्ची का दाखिला हर हाल में कराया जाए।" मुख्यमंत्री का यह बालसुलभ संवाद और संवेदनशील निर्णय प्रशासनिक कड़ेपन के साथ उनके मानवीय पक्ष को भी उजागर करता है।
>बच्ची बोली: योगी जी ने बिस्कुट और चॉकलेट भी दी!
>वाची ने बातचीत के दौरान प्रसन्नता से बताया कि मुख्यमंत्री ने न सिर्फ उसकी बात सुनी, बल्कि उसे बिस्कुट और चॉकलेट भी दी। उसके चेहरे की मुस्कान और आत्मविश्वास ये बताने के लिए काफी थे कि एक बच्ची की उम्मीद को कैसे एक संवेदनशील नेता ने संबल दिया।
>बालमन से जुड़ते योगी: एक संत, एक प्रशासक और एक स्नेही व्यक्ति
>गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में योगी आदित्यनाथ का संत स्वरूप, मुख्यमंत्री के रूप में अनुशासनप्रिय छवि, और बच्चों से आत्मीय संवाद उनकी तीनों भूमिकाओं की एक दुर्लभ झलक प्रस्तुत करता है।
हर दौरे या कार्यक्रम में वे बच्चों से संवाद करते हैं, हालचाल पूछते हैं और उत्साहवर्धन करते हैं। वाची के साथ हुआ यह प्रसंग एक बार फिर यही सिद्ध करता है कि एक सच्चे जननायक वही होता है, जो बच्चों की बात सुनना और समझना जानता है।
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