>उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में सहकारी बैंक कर्मचारियों और जनसेवा केंद्र संचालकों की मिलीभगत से किसानों के खातों से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की रकम धोखे से निकालने का मामला सामने आने के बाद, पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव बैंक प्रबंधन ने सभी जिला सहकारी बैंकों (DCBs) को निर्देश जारी किए हैं कि लाभार्थीपरक योजनाओं से जुड़े खातों की जांच कराई जाए।
>प्रबंधन ने साफ किया है कि यह सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है कि सरकारी योजनाओं की राशि केवल वास्तविक और पात्र लाभार्थियों के खातों में ही पहुँचे। सभी शाखाओं को निर्देशित किया गया है कि वे इस तरह के खातों का गहन निरीक्षण करें और किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़े को सख्ती से रोका जाए।
>बरेली के फरीदपुर शाखा में एक जन सेवा केंद्र संचालक ने, कथित रूप से जिला सहकारी बैंक के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर, फर्जी आधार और पैन कार्ड के जरिए किसानों के बंद पड़े खातों को दोबारा सक्रिय कराया। इन खातों में आई किसान सम्मान निधि की रकम को योजनाबद्ध तरीके से निकाल लिया गया।
>यह मामला तब उजागर हुआ जब कुछ किसानों ने बैंक पासबुक अपडेट कराई और उन्हें पता चला कि उनके खाते से बिना जानकारी के रकम निकाली जा चुकी है। जांच में सामने आया कि निष्क्रिय और अप्रचलित खातों का केवाईसी कराकर, उनमें आई सरकारी धनराशि को निकाला गया।
>उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक आर.के. कुलश्रेष्ठ ने प्रदेश के सभी 50 जिला सहकारी बैंकों के सचिवों एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देशित किया है कि केंद्र एवं राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं (जैसे पीएम किसान, उज्ज्वला, आवास योजना आदि) से मिलने वाली DBT (Direct Benefit Transfer) राशि केवल सही लाभार्थी तक ही पहुंचे — इसके लिए खातों की पूरी जांच अनिवार्य है।
>उन्होंने यह भी कहा कि बैंक की शाखाओं को तत्काल इस तरह के खातों की ऑडिट रिपोर्ट तैयार कर प्रबंधन को सौंपनी होगी।
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